सोशल संवाद / डेस्क : दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने चार वर्षीय बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी 22 वर्षीय सनी कुमार को पूरी जिंदगी जेल में बिताने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर और अमानवीय है, लेकिन यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड देना उचित नहीं माना जा सकता।

यह भी पढ़े : SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने सजा सुनाते हुए कहा कि आरोपी की उम्र केवल 22 वर्ष है और उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि दोषी ने अपने अपराध पर पछतावा जताया है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मौत की सजा के बजाय आजीवन कारावास का फैसला सुनाया।
पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था आरोपी
इस मामले में अदालत ने 30 अप्रैल को आरोपी सनी कुमार को बच्ची के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म करने का दोषी करार दिया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि भारतीय कानून में मृत्युदंड केवल उन मामलों में दिया जाता है, जिन्हें दुर्लभतम श्रेणी का माना जाए।
पीड़िता के लिए 13.5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
कोर्ट ने पीड़ित बच्ची के इलाज और पुनर्वास के लिए 13.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। अदालत के अनुसार पांच लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।
अदालत ने कहा कि बच्ची को गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा है। कई सर्जरी और लंबे इलाज की प्रक्रिया किसी भी बच्चे के लिए बेहद कष्टदायक होती है। ऐसे में उसके भविष्य और देखभाल के लिए आर्थिक सहायता बेहद जरूरी है।
अदालत ने कहा- अपराध बेहद अमानवीय
अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को बेहद गंभीर और जानलेवा चोटें पहुंचाई गईं, जो क्रूर यौन हिंसा को दर्शाती हैं। अदालत ने दोषी के कृत्य को अमानवीय और निंदनीय बताते हुए कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर संवेदनशीलता और सख्ती के साथ कार्रवाई जरूरी है, ताकि समाज में मजबूत संदेश जाए।









