सोशल संवाद / सरायकेला: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), सरायकेला-खरसावां द्वारा पारा विधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) के लिए क्षमता संवर्धन सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पारा विधिक स्वयंसेवकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा बाल अधिकारों से जुड़े हितधारकों ने भाग लिया।

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बाल श्रम उन्मूलन और बच्चों के अधिकारों पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारा विधिक स्वयंसेवकों की क्षमता को मजबूत करना तथा बाल श्रम, बच्चों के अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएलएसए के सचिव तौसीफ मेराज ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इससे बच्चों के शारीरिक, मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि पारा विधिक स्वयंसेवक बाल श्रम की पहचान करने, पीड़ित बच्चों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने और उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाल श्रम कानूनों की दी गई जानकारी
सचिव ने प्रतिभागियों को बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 समेत विभिन्न कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल श्रमिकों को रोजगार देने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ कानून के तहत कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा, संरक्षण और सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सामुदायिक सहभागिता को बताया अहम
कार्यक्रम में परिवीक्षाधीन उप समाहर्ता नवीन कुमार बाड़ा एवं विष्णु मुंडा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
उन्होंने पारा विधिक स्वयंसेवकों से अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने तथा बाल श्रम से जुड़ी घटनाओं की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
बाल श्रम मुक्त समाज बनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बाल श्रम से संबंधित कानूनों, बच्चों के अधिकारों, पुनर्वास योजनाओं और रोकथाम के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। अंत में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का संदेश
कार्यक्रम का समापन बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ। डीएलएसए ने समाज के सभी वर्गों से बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और बच्चों को शिक्षा एवं बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग करने की अपील की।
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