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दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने चौधरी ब्रह्म प्रकाश के असाधारण योगदान को किया स्मरण

By Riya Kumari

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दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने चौधरी ब्रह्म प्रकाश के असाधारण योगदान को किया स्मरण

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सोशल संवाद / नई दिल्ली : आधुनिक दिल्ली की कहानी चौधरी ब्रह्म प्रकाश के असाधारण योगदान को स्वीकार किए बिना नहीं लिखी जा सकती। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने दिल्ली की लोकतांत्रिक एवं विकासात्मक यात्रा को दिशा प्रदान की,” यह बात दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा परिसर में दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कही।

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गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री को 108वीं जयंती के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा किए गए योगदान को याद किया। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के माननीय उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक ओम प्रकाश शर्मा, राजकुमार भाटिया तथा चौधरी ब्रह्म प्रकाश के परिजन एवं रिश्तेदार उपस्थित थे।

विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने बहुत कम आयु में स्वयं को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया था और बिना किसी राजनीतिक पद अथवा व्यक्तिगत लाभ की आकांक्षा के ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भावी मुख्यमंत्री एवं सांसद के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए समर्पित एक युवा सेनानी के रूप में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और ऐसे समय में अद्भुत साहस का परिचय दिया, जब औपनिवेशिक शासन का सामना करना कोई साधारण बात नहीं थी।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उनके योगदान का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने सादगी एवं सिद्धांतों पर आधारित जीवन जीते हुए दिल्ली के विकास, किसानों के कल्याण तथा राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर कार्य किया। उन्होंने कहा कि सत्ता के उच्च पदों पर रहते हुए भी उन्होंने संघर्ष का मार्ग नहीं छोड़ा और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिन आदर्शों के लिए संघर्ष किया था, उन्हें जीवनभर आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि साहस और दृढ़ विश्वास चौधरी ब्रह्म प्रकाश के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की नीतियों से मतभेदों का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में नेहरू जी के अत्यंत प्रभावशाली स्थान के बावजूद चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने कभी भी अपनी बात कहने में संकोच नहीं किया, जब उन्हें लगा कि दिल्ली और उसके नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए ऐसा करना आवश्यक है। उनके कार्यों में जनता के प्रति गहरी जवाबदेही और उत्तरदायित्व की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।

स्वतंत्र भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक, आपातकाल के दौरान उनके बलिदान को याद करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने उन्नीस महीने तक जेल में रहकर कठिन यातनाएं झेलीं। उन्होंने कहा कि यह त्याग लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रताओं और जनसेवा के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

दिल्ली विधानसभा परिसर में स्थापित चौधरी ब्रह्म प्रकाश की प्रतिमा का उल्लेख करते हुए विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि यह सम्मान उनके जीवनभर की जनसेवा और योगदान के प्रति समाज द्वारा व्यक्त की गई गहरी श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो उस समय विपक्ष के नेता थे, स्वयं विधानसभा परिसर आए थे और उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश की स्मृति में स्थापित इस प्रतिमा का लोकार्पण कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की थी।

अपने संबोधन के समापन पर विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश का जीवन और विरासत आज भी जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों की अनेक पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे उनके त्याग, ईमानदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और जनकल्याण की भावना से प्रेरणा लें तथा एक सशक्त, समृद्ध और विकसित दिल्ली एवं भारत के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करें।

दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, जनसेवा तथा समाज कल्याण के प्रति अटूट समर्पण के माध्यम से दिल्ली और उसके नागरिकों के जीवन पर अमिट छाप छोड़ी।

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