सोशल संवाद / जमशेदपुर: सामाजिक चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान समय में सरकार को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने एक प्रेस बयान जारी कर विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

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सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया विदेशी दौरों के दौरान भी विरोध के स्वर सुनाई दिए। उनका दावा है कि देश के अंदर भी कई मुद्दों को लेकर जनता सरकार से नाराज दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों में सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन पर लगातार बहस और विवाद होते रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम राजनीति, मंदिर-मस्जिद विवाद, नोटबंदी, कोरोना काल की चुनौतियां, केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई, बेरोजगारी, महंगाई, यूजीसी से जुड़े मुद्दे, जातिगत राजनीति, रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
सुधीर कुमार पप्पू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मणिपुर की स्थिति और पश्चिम बंगाल की राजनीति का भी जिक्र करते हुए सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि देश में महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उनका दावा है कि युवा और छात्र वर्ग इन मुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
अपने बयान में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी हालात पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर सत्ता को लेकर खींचतान की चर्चा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और संगठन के बीच दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है।
अंत में सुधीर कुमार पप्पू ने दावा किया कि यदि सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं करती है, तो आने वाले समय में उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
(नोट: यह बयान सामाजिक चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार उनके निजी हैं।)










