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‘पापा अब और दर्द नहीं झेलना चाहते थे…’ राम कपूर का भावुक खुलासा, बोले- उनके आखिरी फैसले में मैंने उनका साथ दिया

By Sanjana Das

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'पापा अब और दर्द नहीं झेलना चाहते थे…' राम कपूर का भावुक खुलासा, बोले- उनके आखिरी फैसले में मैंने उनका साथ दिया

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सोशल संवाद/डेस्क: अभिनेता राम कपूर ने अपने निजी जीवन से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और वे अब दर्द के साथ जिंदगी नहीं जीना चाहते थे।

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राम कपूर ने कहा कि उनके पिता की यही इच्छा थी कि उन्हें कृत्रिम सहारे पर लंबे समय तक जीवित न रखा जाए। ऐसे मुश्किल समय में उन्होंने अपने पिता की इच्छा का सम्मान किया और उनके आखिरी फैसले में उनका साथ दिया।

“यह फैसला आसान नहीं था”

राम कपूर ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था। किसी अपने को खोने का दर्द अलग होता है, लेकिन जब वही अपना व्यक्ति लगातार तकलीफ में हो और अपनी इच्छा जाहिर करे, तब फैसला लेना और भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने जो भी किया, वह अपने पिता की इच्छा और उनकी पीड़ा को देखते हुए किया। यह किसी भावनात्मक आवेश में लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि एक बेहद कठिन पारिवारिक परिस्थिति थी।

परिवार से रिश्तों पर भी पड़ा असर

राम कपूर ने यह भी खुलासा किया कि इस घटना के बाद उनके परिवार में मतभेद पैदा हो गए। उनके अनुसार, उनकी मां और बहन ने उनके फैसले से सहमति नहीं जताई और धीरे-धीरे उनसे दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि इस घटना का असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ा। हालांकि, अभिनेता का कहना है कि आज भी उन्हें इस बात का अफसोस नहीं है कि उन्होंने अपने पिता की इच्छा का सम्मान किया। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें यही सही लगा।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

राम कपूर के इस भावुक खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग उनकी ईमानदारी और हिम्मत की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग जीवन के अंतिम चरण में इलाज और मरीज की इच्छा जैसे संवेदनशील विषयों पर अपनी राय भी दे रहे हैं।

संवेदनशील मुद्दा, हर मामला अलग होता है

जीवन के अंतिम चरण से जुड़े फैसले हमेशा बेहद संवेदनशील और जटिल होते हैं। ऐसे मामलों में मरीज की स्थिति, उसकी इच्छा, परिवार की सहमति और संबंधित देश के कानून—सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के निजी अनुभव को सामान्य नियम या सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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