सोशल संवाद/डेस्क : लोकसभा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को गुरुवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। खास बात यह रही कि विधेयक पर सदन में कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई और इसे बिना बहस के ही मंजूरी मिल गई।

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सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। नए प्रावधानों के तहत सरकारी रिकॉर्ड को एकीकृत करने और नागरिक सेवाओं में पंजीकरण डेटा के बेहतर उपयोग की व्यवस्था की जाएगी।
विपक्षी दलों ने विधेयक को बिना चर्चा पारित किए जाने पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर सदन में विस्तृत बहस होनी चाहिए थी ताकि इसके कानूनी और प्रशासनिक प्रभावों पर सभी पक्ष अपनी राय रख सकें।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने सदन में कहा कि देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह संशोधन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए राज्यसभा भेजा जाएगा। यदि वहां से भी मंजूरी मिल जाती है और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो जाती है, तो यह संशोधन कानून का रूप ले लेगा।









