सोशल संवाद / रांची : मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को दूसरी पाली में विपक्ष की अनुपस्थिति में सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के पेश पहले अनुपूरक बजट पर चर्चा हुई। सत्ता पक्ष के विधायकों के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार का पक्ष रखा। उसके बाद संबंधित विनियोग विधेयक सदन से पारित हुआ। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्पष्ट निर्देश है कि राज्य का वित्तीय प्रबंधन मजबूत, सुदृढ़ और पारदर्शी हो।

इस दिशा में वित्त विभाग के अधिकारी व कर्मी बेहतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सदन में विपक्ष मौजूद होता तो वे उनसे पूछते कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तहत राज्य को मिलने वाली अनुदान राशि मात्र 7.3 प्रतिशत ही मिली। ऐसा इसलिए क्योंकि झारखंड में उनकी सरकार नहीं है। वित्त मंत्री ने आंकड़े देते हुए बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों और शुल्कों के संग्रह का राज्यों में बंटवारा किया।
इसमें बिहार को 10,845 करोड़, मध्यप्रदेश को 8,010 करोड़, राजस्थान को 6,460 करोड़, महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ और उत्तर प्रदेश को 19,208 करोड़ रुपये मिले। ये सभी वे राज्य हैं, जहां भाजपा की सरकार है। झारखंड को मात्र 3,660 करोड़ रुपये ही मिले, ऐसा इसलिए क्योंकि झारखंड में भाजपा की सरकार नहीं है। यह बताता है कि केंद्र सरकार का राज्य के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार रहा है। दूसरी तरफ नीति आयोग ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन की सराहना की है। नीति आयोग के अनुसार झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में वित्तीय प्रबंधन बेहतर तरीके से हो रहा है।
बिना विपक्ष के चला सदन, विधानसभा अध्यक्ष की आपत्ति
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को बिना विपक्ष के सदन की कार्यवाही चली। पहले चार अल्पसूचित प्रश्न नागेंद्र महतो, चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह, राज सिन्हा और सुरेश बैठा के थे। ये चारों विधायक अनुपस्थित रहे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि सदन में सवाल करके नहीं आना संसदीय परंपरा के लिए अच्छी बात नहीं है। संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य का विपक्ष सदन में मौजूद नहीं है।
ऐसे में कई महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा होनी थी, लेकिन बिना विपक्ष के ही इस पर स्वीकृति देनी पड़ रही है। भोजनावकाश के बाद स्पीकर ने अनुपूरक बजट पर विपक्ष के नहीं रहने पर बिना कटौती प्रस्ताव के चर्चा के लिए तीन घंटे का समय निर्धारित किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेताओं ने चर्चा के लिए एक घंटे का अतिरिक्त समय निर्धारित करने की मांग कार्यमंत्रणा समिति में की थी, लेकिन जब विपक्ष ही नहीं है तो उपस्थित दलों से एक-एक विधायक को बोलने का अवसर दिया जाए और सरकार का उत्तर ले लिया जाए। स्पीकर ने संसदीय कार्य मंत्री के प्रस्ताव को माना।
सदन में विपक्ष की गैरमौजूदगी ठीक नहीं: उमाकांत
अनुपूरक बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता-पक्ष और विपक्ष के बीच वाद-विवाद की स्वस्थ परंपरा रही है, लेकिन आज विपक्ष सदन से नदारद है। साफ है कि उसे लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के हित और झारखंड के विकास के लिए गंभीर है, इसी वजह से पहला अनुपूरक बजट पेश किया गया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को लेकर सरकार ने जितनी तत्परता दिखाई, वैसी किसी अन्य राज्य सरकार ने नहीं दिखाई।









