सोशल संवाद / डेस्क : अगर आपको रात के अंधेरे में रेगिस्तान के बीच जंगली जानवरों को देखने का रोमांच पसंद है, तो गुजरात का डीसा आने वाले समय में आपके लिए खास डेस्टिनेशन बन सकता है। यहां एशिया की पहली डेजर्ट-थीम नाइट सफारी विकसित करने की योजना है। करीब 103 हेक्टेयर में बनने वाली इस परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की मंजूरी मिल चुकी है।

इस प्रोजेक्ट पर करीब 542.14 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। खास बात यह है कि प्रस्तावित पार्क में भारत के अलावा अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाने वाले कई दुर्लभ वन्यजीवों को भी रखा जाएगा।
103 हेक्टेयर में तैयार होगा डेजर्ट सफारी पार्क
गुजरात सरकार के अनुसार, डीसा में लगभग 103 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर आधुनिक रेगिस्तानी चिड़ियाघर और नाइट सफारी विकसित की जाएगी। इस परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है।
प्रोजेक्ट की लोकेशन भी काफी खास बताई जा रही है। यहां प्राकृतिक रेत के टीले मौजूद हैं और पास में बनास नदी बहती है। इसके अलावा सड़क और रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने के कारण पर्यटकों के लिए यहां पहुंचना आसान होगा।
रात में दिखेंगे रेगिस्तान के खास वन्यजीव
इस डेजर्ट-थीम पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण नाइट सफारी होगी। सूर्यास्त के बाद पर्यटक विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़ों में रात के समय सक्रिय रहने वाले जानवरों को देख सकेंगे। नाइट सफारी के लिए 5 विशेष बाड़े बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा दिन के समय पर्यटकों के लिए अलग चिड़ियाघर क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
83 प्रजातियों के करीब 2,700 जीव-जंतु
प्रस्तावित चिड़ियाघर में देश-विदेश की करीब 83 प्रजातियों के लगभग 2,700 पशु-पक्षी रखे जाने की योजना है। इनमें भारत, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कई खास रेगिस्तानी जीव शामिल होंगे।
भारत के ये जानवर होंगे आकर्षण
भारतीय प्रजातियों में चिंकारा, काला हिरण, भारतीय जंगली गधा, एशियाई शेर, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, काराकल, रेगिस्तानी लोमड़ी, भेड़िया और धारीदार लकड़बग्घा जैसे वन्यजीव शामिल किए जाने की योजना है।
अफ्रीका के दुर्लभ जानवर भी आएंगे नजर
अफ्रीकी सेक्शन में अफ्रीकी चीता, अफ्रीकी शेर, जिराफ, ज़ेब्रा, काला गैंडा, चिंपैंजी, मीरकैट, फेनेक फॉक्स और शुतुरमुर्ग जैसे जानवरों को शामिल किया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया की प्रजातियां भी होंगी मौजूद
ऑस्ट्रेलियाई वन्यजीवों में कंगारू, एमू और वॉलबी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण होंगे।
रेनफॉरेस्ट बायोम से लेकर विशाल एक्वेरियम तक
यह परियोजना सिर्फ नाइट सफारी तक सीमित नहीं होगी। प्रस्तावित पार्क में रेप्टाइल सफारी, रेनफॉरेस्ट बायोम और एक विशाल एक्वेरियम भी विकसित किए जाने की योजना है। इससे पर्यटकों को एक ही परिसर में अलग-अलग प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिल सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा जोर
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रीन बफर जोन विकसित किए जाने की योजना है। इसके अलावा पर्यटकों के लिए बटरफ्लाई पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, फूड कोर्ट, गोल्फ कार्ट सेवा और स्मृति चिन्ह की दुकानें भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
गुजरात सरकार के मुताबिक, डीसा का यह प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, पुनर्वास और पर्यावरण शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है। अगर यह परियोजना प्रस्ताव के मुताबिक विकसित होती है, तो डीसा गुजरात के नए प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है और पर्यटकों को रात में रेगिस्तानी वन्यजीव देखने का एक बिल्कुल अलग अनुभव मिल सकता है।









