सोशल संवाद / डेस्क : दिल्ली सरकार से जुड़े एक मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने निलंबित एडिशनल कमिश्नर को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी ने पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए लिखित जवाब दिया था। भारद्वाज के मुताबिक, असम के एक निगम की ओर से प्राप्त पत्र को भारतीय खाद्य निगम (FCI) भेजने की कार्रवाई मनमाने तरीके से नहीं की गई थी, बल्कि तत्कालीन मंत्री सिरसा से चर्चा और उनके निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया था।

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सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मामले को जिस तरह से सामने रखा जा रहा है, उससे ऐसा लग सकता है कि अधिकारी ने अपने स्तर पर कोई फैसला लिया था। हालांकि, उनका दावा है कि संबंधित अधिकारी ने अपने लिखित जवाब में पूरी प्रक्रिया और घटनाक्रम का उल्लेख किया है। अधिकारी के मुताबिक, असम के निगम की ओर से आया पत्र मंत्री के संज्ञान में लाया गया था और इस पर चर्चा के बाद आगे की कार्रवाई करने के निर्देश मिले थे।
मंत्री से चर्चा के बाद भेजा गया पत्र
भारद्वाज के अनुसार, असम के निगम का पत्र मिलने के बाद उसे सीधे FCI को भेजने से पहले संबंधित मंत्री से चर्चा की गई थी। मंत्री की ओर से निर्देश मिलने के बाद ही पत्र भारतीय खाद्य निगम को भेजा गया। उन्होंने कहा कि ऐसे में केवल अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने से पहले यह देखना जरूरी है कि उस समय निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या थी और उसमें किन-किन स्तरों पर चर्चा हुई थी।
उन्होंने निलंबित एडिशनल कमिश्नर के लिखित जवाब का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारी ने अपनी सफाई में घटनाक्रम को विस्तार से बताया है। इसमें पत्र प्राप्त होने से लेकर उसे आगे भेजे जाने तक की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
लिखित जवाब को बताया अहम
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि निलंबित अधिकारी की ओर से दिया गया लिखित जवाब इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि यदि अधिकारी ने किसी वरिष्ठ स्तर से मिले निर्देश के बाद कार्रवाई की थी, तो इसकी भी जांच में स्पष्ट रूप से पड़ताल होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पत्र भेजने की प्रक्रिया में मंत्री से चर्चा और निर्देश शामिल थे, तो केवल अधिकारी की भूमिका को आधार बनाकर कार्रवाई क्यों की गई। भारद्वाज ने कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और अधिकारियों के बयान सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर लिए गए फैसलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विवाद का केंद्र असम के निगम की ओर से भेजे गए पत्र और उसके FCI तक पहुंचने की प्रक्रिया है। अब यह जांच का विषय है कि पत्र किस उद्देश्य से भेजा गया था, उसे आगे भेजने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और संबंधित अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए थे।
सौरभ भारद्वाज का कहना है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पूरी प्रक्रिया को देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि लिखित रिकॉर्ड में मंत्री से चर्चा और निर्देश का उल्लेख है, तो उस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
मामले में आगे क्या?
फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा जारी है। निलंबित एडिशनल कमिश्नर की लिखित सफाई, मंत्री के निर्देश और असम के निगम से आए पत्र को आगे भेजने की पूरी प्रक्रिया अब जांच के दायरे में महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है।
सौरभ भारद्वाज के बयान के बाद इस मामले में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों और अधिकारियों के बयानों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकालती हैं। यदि लिखित जवाब में बताए गए घटनाक्रम की पुष्टि होती है, तो मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को लेकर भी नए सवाल सामने आ सकते हैं।









