सोशल संवाद / रांची : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड के लिए स्वीकृत करीब 15 हजार करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में से लगभग 10 हजार करोड़ की परियोजनाओं को डी-सैंक्शन (अस्वीकृत) कर दिया है। केंद्र ने इसके लिए समय पर भूमि अधिग्रहण नहीं होने, फॉरेस्ट क्लियरेंस नहीं मिलने, निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने और तकनीकी स्वीकृतियों में देरी को आधार बनाया है। इस कार्रवाई को झारखंड के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

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हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराइबुरु सड़क निर्माण से राज्य की राजनीति का पुराना विवाद रहा है। दो वर्ष पहले इसके चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की योजना आवंटित की गई थी, पर तय समय में जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका। फॉरेस्ट क्लियरेंस और अन्य तकनीकी स्वीकृतियां भी लंबित रहीं।
इन परियोजनाओं पर असर
हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराइबुरु सड़क, हजारीबाग-बगोदर सड़क जैसी महत्वपूर्ण सड़कों को केंद्र ने अस्वीकृत कर दिया है। इसके अलावा चाईबासा-हाटगम्हरिया एनएच पर छह नंबर आरओबी का निर्माण भी डी-सैंक्शन किया गया है। इन परियोजनाओं के रुकने से राज्य के कई इलाकों की कनेक्टिविटी और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
कंटिजेंसी से 50 करोड़ से ज्यादा कटने पर आपत्ति
बीते दो-तीन वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के काम में बाधा, भुगतान में देरी और निर्धारित शर्तों का पालन नहीं होने जैसे मामलों में 50 करोड़ से अधिक की राशि विभाग की कंटिजेंसी से काटी गई और संवेदकों को भुगतान किया गया। पथ निर्माण विभाग ने इस कटौती पर केंद्र को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। विभाग का तर्क है कि कई मामलों में काम रुकने या भुगतान में देरी के पीछे केवल राज्य विभाग जिम्मेदार नहीं था। कई प्रक्रियाओं में देरी भी परियोजनाओं की रफ्तार रोकी।









