सोशल संवाद/डेस्क : किसी के जन्मदिन पर केक कटे और जश्न हो, यह आम बात है। लेकिन अगर उसी दिन किसी की जिंदगी बचाने की कोशिश हो, तो वह दिन और भी खास बन जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा गम्हरिया स्थित आरएसबी यूनिट IV में देखने को मिला, जहां आरएसबी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आर. के. बेहेरा के जन्मदिन के मौके पर विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

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शिविर में आरएसबी के कर्मचारियों और स्वयंसेवकों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान करीब 340 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जो जरूरतमंद मरीजों के लिए मददगार साबित हो सकता है।
रक्तदाताओं का बढ़ाया हौसला
रक्तदान शिविर में बेहेरा परिवार की ओर से श्रीमती संगीता बेहेरा और श्रीमती नलिनी बेहेरा भी मौजूद रहीं। उन्होंने रक्तदान करने वाले कर्मचारियों और स्वयंसेवकों का उत्साह बढ़ाया और इस पहल की सराहना की।
श्रीमती संगीता बेहेरा ने कहा कि जन्मदिन का उत्सव तब ज्यादा सार्थक लगता है, जब उसे मानव सेवा से जोड़ा जाए। कर्मचारियों को स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आगे आते देखना आरएसबी परिवार की सेवा भावना को दिखाता है।
वहीं, श्रीमती नलिनी बेहेरा ने कहा कि रक्त की हर एक यूनिट किसी जरूरतमंद के लिए नई उम्मीद बन सकती है। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप से लेकर कार्यालय तक कर्मचारियों में रक्तदान को लेकर दिखा उत्साह इस पूरे आयोजन को खास बनाता है।
सिर्फ एक दिन नहीं, सालभर चलता है अभियान
आरएसबी ग्रुप के लिए रक्तदान सिर्फ किसी खास दिन तक सीमित पहल नहीं है। कंपनी की विभिन्न इकाइयों में पूरे साल रक्तदान शिविर और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आरएसबी ग्रुप की विभिन्न इकाइयों से हर साल करीब 4,000 यूनिट रक्तदान किया जाता है। इसमें गम्हरिया की इकाइयों की भी बड़ी भूमिका है, जो सालाना करीब 1,800 यूनिट रक्त का योगदान देती हैं।
यह योगदान स्थानीय अस्पतालों और जरूरतमंद मरीजों के लिए आपात स्थिति में रक्त की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कर्मचारियों की भागीदारी बनी आयोजन की ताकत
आरएसबी ग्लोबल की लीड एचआर सुश्री जया सिंह ने कहा कि कंपनी के लिए औद्योगिक विकास के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और बेहेरा परिवार की मौजूदगी ने रक्तदान शिविर को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
आरएसबी का मूल विचार “मानवता हमारा मार्ग है, उत्कृष्टता हमारा लक्ष्य है” भी इस आयोजन में साफ तौर पर नजर आया। जन्मदिन के मौके पर आयोजित यह रक्तदान शिविर सिर्फ एक कॉर्पोरेट कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों और प्रबंधन के साथ मिलकर समाज के लिए कुछ करने की पहल बन गया।
जमशेदपुर से शुरू हुआ सफर, अब वैश्विक पहचान
आरएसबी ग्रुप की शुरुआत 1975 में जमशेदपुर से डॉ. आर. के. बेहेरा और श्री एस. के. बेहेरा ने की थी। आज समूह भारत के कई प्रमुख औद्योगिक शहरों के अलावा अमेरिका और मैक्सिको में भी अपनी विनिर्माण इकाइयों के जरिए काम कर रहा है।
ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और सिस्टम्स से लेकर विभिन्न औद्योगिक उपकरणों के निर्माण तक आरएसबी ग्रुप की गतिविधियां फैली हुई हैं। कंपनी औद्योगिक क्षेत्र में अपनी भूमिका के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी लगातार आगे बढ़ाने पर जोर देती है।









