सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2015 से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से चल रहे कानूनी संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि शारीरिक परीक्षा पास करने वाले सभी योग्य अभ्यर्थियों के दस्तावेज और पहचान का सत्यापन कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। इस फैसले के बाद लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

7,272 पदों पर निकली थी भर्ती
जानकारी के मुताबिक, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से साल 2015 में झारखंड पुलिस में कांस्टेबल के 7,272 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी करीब 2,380 पद रिक्त रह गए थे। अभ्यर्थियों का दावा था कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के जरूरी चरणों में सफलता हासिल की थी और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद रिक्त पदों को भरने के लिए दूसरी मेधा सूची जारी नहीं की गई। इसके बाद अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया और मामला अदालत तक पहुंच गया।
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने पहले झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, वहां से याचिका खारिज होने के बाद अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बोकारो के जितेंद्र कुमार शर्मा व अन्य सहित छह अलग-अलग याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्या निर्देश दिया?
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि शारीरिक परीक्षा में सफल रहे सभी पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेज और पहचान का सत्यापन किया जाए। इसके बाद पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। इस आदेश के बाद अब संबंधित अभ्यर्थियों की नजर झारखंड सरकार और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है।
2,380 रिक्त पद बने थे विवाद की वजह
इस भर्ती प्रक्रिया में 2,380 पद खाली रह जाना पूरे विवाद का एक प्रमुख मुद्दा रहा। अभ्यर्थियों का कहना था कि जब भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और वे चयन प्रक्रिया के जरूरी चरणों में सफल हो चुके हैं, तो उन्हें नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी मेधा सूची जारी नहीं होने के कारण मामला लगातार कानूनी विवाद में बना रहा।
अभ्यर्थियों की लंबी लड़ाई का हुआ अंत
2015 की भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर वर्षों तक संघर्ष किया। आंदोलन से लेकर अदालत तक की लड़ाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उनके लिए नियुक्ति की उम्मीद को मजबूत कर दिया है। हालांकि, नियुक्ति से पहले दस्तावेज और पहचान का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
निष्कर्ष
Jharkhand Police Constable Recruitment 2015 का मामला लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब योग्य अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। सरकार को अदालत के निर्देश के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर पात्र अभ्यर्थियों को निर्धारित समय-सीमा में नियुक्ति पत्र जारी करना होगा।









