सोशल संवाद / नई दिल्ली : दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने से छात्रों की मौत के बीच कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर अवैध व खतरनाक निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को खत्म करने और जेल जाने की सजा का प्रावधान हटाने का अहम खुलासा किया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त ने सोमवार को बताया कि सरकार ने हाल ही में जन विश्वास एक्ट पास कर दिल्ली नगर निगम अधिनियम (डीएमसी एक्ट) की धारा 466(ए) हटा दी है, जिससे अब दिल्ली में अवैध और खतरनाक निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कोई कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान अवैध निर्माण के मामलों में आपराधिक कार्रवाई का आधार था।
कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त ने कहा कि वर्ष 1985 में राजीव गांधी की सरकार ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम में धारा 466(ए) जोड़ी थी। इसके तहत अवैध व खतरनाक निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर छह महीने की जेल और जुर्माने का आपराधिक प्रावधान रखा गया था। इसका नतीजा ये रहा कि वर्षों तक कड़ी कार्रवाई हुई और कई बिल्डर जेल गए। कांग्रेस नेता ने बताया कि वर्तमान मोदी सरकार द्वारा हाल ही में इस धारा को समाप्त किए जाने से बिल्डरों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है और पूरी दिल्ली में बिना डर के अवैध निर्माण व बेसमेंट खुदाई का काम धड़ल्ले से चल रहा है।
कांग्रेस नेता ने दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों को ‘कागजी छलावा’ बताते हुए कहा कि नगर निगम ने इस साल 32 से 34 लाख घरों का सर्वे करने का दावा किया था, लेकिन महज 19 घरों को ही खतरनाक घोषित किया। 2023 से लेकर 2026 तक नगर निगम ने एक करोड़ इमारतों का सर्वे किया और मात्र 103 इमारतों को खतरनाक बताया गया। उन्होंने चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि हाल के दिनों में सत्य निकेतन के साथ मुस्तफाबाद, साकेत, रोहिणी और करोल बाग में जो इमारतें ढही हैं, उनमें से एक भी खतरनाक घोषित इमारतों की सूची में दर्ज नहीं थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों पर तो बुलडोजर चलाती है, लेकिन बड़े-बड़े बिल्डरों को बचाने का काम करती है।
अभिषेक दत्त ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले 12 वर्षों में बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं विकसित करने में विफल रही है। इसके कारण दूर-दराज के इलाकों से पढ़ाई करने आए छात्र बिना सुरक्षा मानकों वाले और अवैध रूप से निर्मित पीजी में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की मिलीभगत की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अभिषेक दत्त ने आगे कहा कि अगर अधिकारियों ने अपना काम ठीक से किया होता और इन इमारतों को खतरनाक घोषित कर खाली करवा लिया जाता, तो छात्रों की मौत नहीं होती। उन्होंने मांग की कि अवैध निर्माण पर आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने वाली धारा 466(ए) को तुरंत बहाल किया जाए। इसके साथ ही केवल निलंबन की खानापूर्ति करने के बजाय लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को धारा 56(जे) के तहत सेवा से सीधे बर्खास्त किया जाए। कांग्रेस ने पूरी दिल्ली में नए सिरे से पारदर्शी स्ट्रक्चरल सर्वे कराने, खतरनाक इमारतों की सूची एमसीडी की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने तथा मृतक युवाओं के परिवारों को कम से कम एक-एक करोड़ रुपये की राशि देने की मांग की है।










