घाघीडीह केंद्रीय कारा : जेल के बंदियों को ओपन बैरक में रखने का फैसला कमेटी करेगी

By Tamishree Mukherjee

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घाघीडीह केंद्रीय कारा

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : झारखंड की जेलों में बंदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में ओपन बैरक व्यवस्था शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। घाघीडीह केंद्रीय कारा समेत राज्य की चार केंद्रीय जेलों में ओपन और सेमी ओपन बैरक विकसित किए जाने हैं। इनमें किस बंदी को रखा जाएगा, इसका फैसला चयन कमेटी करेगी। इसके लिए बंदियों की पात्रता का आकलन शुरू कर दिया गया है।

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घाघीडीह केंद्रीय कारा में दो वार्ड को ओपन बैरक के रूप में विकसित करने की तैयारी है। यहां करीब 50 बंदियों को रखने का प्रस्ताव है। जेल प्रशासन ने पात्र बंदियों के नाम, उनके मामलों और जेल में आचरण से जुड़ी जानकारी तैयार कर विभाग को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद वरीय अधिकारियों की समिति बंदियों के चयन पर अंतिम निर्णय लेगी। ओपन बैरक की सुविधा सभी बंदियों को नहीं मिलेगी। इसके लिए सजायाफ्ता बंदियों में से ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने सजा का पर्याप्त हिस्सा पूरा कर लिया हो और जेल में उनका आचरण अच्छा रहा हो। जेल में मारपीट, विवाद या अनुशासनहीनता में शामिल रहे बंदियों को चयन से बाहर रखा जा सकता है। फरार होने की आशंका और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का भी चयन में ध्यान में रखा जाएगा।

सुबह जेल से निकलेंगे, शाम को लौटना होगाः

ओपन बैरक में चयनित बंदियों को रोजगार या मजदूरी के लिए दिन में जेल से बाहर जाने का अवसर मिलेगा। उन्हें जिस कंपनी, संस्थान या स्थान पर काम करना है, उसकी पूरी जानकारी जेल प्रशासन को देनी होगी। मि काम खत्म होने के बाद निर्धारित समय पर जेल लौटना अनिवार्य होगा। इसका इ उद्देश्य बंदियों को रोजगार से जोड़ना और जेल से बाहर निकलने के बाद सामान्य वि जीवन जीने के लिए तैयार करना है।

जल्द शुरू होगा बैरक बनाने का काम

राज्य में चार केंद्रीय जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। घाघीडीह में प्रस्तावित दो वार्डों को ओपन बैरक के रूप में तैयार किया जाएगा। जेल प्रशासन की रिपोर्ट और बंदियों की पात्रता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण व अन्य जरूरी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा। ओपन बैरक में रहने वाले बंदियों को जेल प्रशासन के तय नियमों का पालन करना होगा। निर्धारित समय पर जेल नहीं लौटने या अनुशासन तोड़ने पर उनके खिलाफ ओपन बैरक की सुविधा वापस ली जा सकती है।

बंदी परिवार की आर्थिक मदद कर सकेंगे

बंदियों को अपनी कमाई से परिवार की आर्थिक मदद का अवसर भी मिलेगा। साथ ही लंबे समय तक जेल में रहने के बाद समाज में लौटने से पहले उन्हें कामकाज का अनुभव हासिल होगा। सरकार की इस पहल का मकसद बंदियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और उनके सामाजिक पुनर्वास को आसान बनाना है।

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