आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, मनी लॉन्ड्रिंग केस में डिस्चार्ज याचिका खारिज

By Riya Kumari

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आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, मनी लॉन्ड्रिंग केस में डिस्चार्ज याचिका खारिज

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सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज की गई थी। इसके साथ ही मामले में आरोपों से मुक्त करने की उनकी मांग वाली याचिका भी खारिज हो गई।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल से किया इनकार

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागु की पीठ के समक्ष हुई। इससे पहले रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी। इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।

क्या है मामला?

यह मामला ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन से जुड़े कथित कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है। ईडी के अनुसार, जांच के दौरान टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कथित कमीशन वसूली की व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज और बयान सामने आए थे।

झारखंड हाईकोर्ट के 6 मई 2026 के फैसले में ईडी की ओर से पेश सामग्री का उल्लेख किया गया था। अदालत ने डिस्चार्ज के स्तर पर यह देखा था कि आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है या नहीं।

तलाशी में 37.55 करोड़ रुपये नकद बरामदगी का दावा

ईडी की जांच के दौरान मई 2024 में विभिन्न ठिकानों पर हुई तलाशी में करीब 37.55 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात एजेंसी के दस्तावेजों में कही गई है। ईडी ने टेंडर आवंटन के बदले कथित कमीशन वसूली से जुड़े आरोप भी लगाए हैं।

ईडी के अनुसार, कथित कमीशन कुल टेंडर मूल्य का करीब 3.2 प्रतिशत था, जिसमें तत्कालीन मंत्री के लिए करीब 1.5 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित होने का आरोप लगाया गया था। हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर इस स्तर पर आलमगीर आलम की कथित भूमिका को खारिज नहीं किया था।

हालांकि, अदालत द्वारा डिस्चार्ज के चरण में प्रथमदृष्टया सामग्री पर विचार किया जाना अंतिम दोषसिद्धि का फैसला नहीं है। मामले में आरोपों और साक्ष्यों पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान होना है।

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