सोशल संवाद / डेस्क : सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और संतुलित जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा, कुलसचिव डॉ. नीत नयना सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शैक्षणिक सफलता, सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़ा हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर दिया जोर
कार्यक्रम का संचालन और विषय प्रवेश मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कुसुम कुमारी लकड़ा ने किया। उन्होंने मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और भावनात्मक मजबूती को विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा करना और समस्याओं को साझा करना आवश्यक है।
गणित विभाग के विभागाध्यक्ष कृष्णानंद दत्ता ने विद्यार्थियों को अनुशासित दिनचर्या अपनाने, पढ़ाई के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। वहीं, इतिहास विभाग की छात्रा मानवी हेम्ब्रम ने भी अपने विचार साझा किए।
मानसिक रूप से सशक्त नागरिक ही राष्ट्र की असली ताकत: डॉ. शिवचन्द्र झा
राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्र के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी देश की प्रगति का आकलन केवल आर्थिक विकास, वैज्ञानिक उपलब्धियों और शैक्षणिक सफलता से नहीं किया जा सकता। इसके लिए नागरिकों का स्वस्थ, संवेदनशील और मानसिक रूप से सशक्त होना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की निर्णय क्षमता, सामाजिक व्यवहार और चुनौतियों का सामना करने की योग्यता को प्रभावित करता है। मानसिक रूप से स्वस्थ नागरिक अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकते हैं।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए मानसिक स्वास्थ्य जरूरी: कुलसचिव
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता के लिए मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय उसे समझने और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं परिवार, मित्रों और भरोसेमंद लोगों के साथ साझा करनी चाहिए। मानसिक मजबूती और भावनात्मक संतुलन विद्यार्थियों को अधिक आत्मविश्वासी, विवेकशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करते हैं।
योग, व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या अपनाने की अपील
कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करना भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को योग, व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, मानसिक रूप से स्वस्थ विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकते हैं।
‘हार नहीं मानूंगा’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ें विद्यार्थी: प्रभाकर सिंह
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का साहस और आत्मविश्वास के साथ सामना करने का संदेश दिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एवं कवि अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा’ का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में निराश होने के बजाय धैर्य, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। पढ़ाई के दबाव और तनाव को कम करने के लिए विद्यार्थियों को पुस्तक-पठन, संगीत और योग जैसी सकारात्मक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
कुलाधिपति ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समाज से केवल लेने वाले नहीं, देने वाले बनें विद्यार्थी
प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देते हुए कहा कि जीवन की सार्थकता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करने में नहीं, बल्कि समाज के कल्याण में योगदान देने में भी है।
उन्होंने कहा, “देने वाले का हाथ ऊपर होता है और लेने वाले का हाथ नीचे।” उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है, जो अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा से मजबूत होगा विकसित भारत का संकल्प
कुलाधिपति ने विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, स्वतंत्र चिंतन, तार्किक समझ और समस्या-समाधान की योग्यता का विकास करना भी है।
उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ और बौद्धिक रूप से सक्षम विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। जब युवा शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक रहेंगे, तभी सशक्त समाज और विकसित भारत का सपना मजबूत आधार प्राप्त करेगा।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि स्वस्थ तन, स्वस्थ मन और विकसित बौद्धिक क्षमता ही सशक्त समाज एवं विकसित भारत की आधारशिला है।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव, विभागाध्यक्षों, वक्ताओं और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सकारात्मक, संतुलित एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।











