झारखंड के ब्रज मोहन राम बने ओडिशा के राज्यपाल, बिहार विधानसभा से लोकसभा तक ऐसा रहा राजनीतिक सफर

By Riya Kumari

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झारखंड के ब्रज मोहन राम बने ओडिशा के राज्यपाल, बिहार विधानसभा से लोकसभा तक ऐसा रहा राजनीतिक सफर

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सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता और पलामू से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। वह वर्तमान राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे। हालांकि, नियुक्ति संबंधित पद का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी।

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Sunrise Enclave

ब्रज मोहन राम का राजनीतिक सफर बिहार विधानसभा से शुरू होकर लोकसभा और अब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद तक पहुंचा है। वह वर्ष 1991 से 1995 तक अविभाजित बिहार की विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद 1996, 1998 और 1999 में पलामू लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए।

चंदवा में हुआ जन्म, लोहरदगा से की पढ़ाई

ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था। चंदवा अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी बताया जाता है।

उन्होंने लोहरदगा के बीएस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। पेशे से कृषि से जुड़े ब्रज मोहन राम ने ग्रामीण परिवेश से निकलकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उनका विवाह लीला देवी से हुआ और उनके तीन बेटे हैं।

1991 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर

ब्रज मोहन राम ने 1991 में भाजपा के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर अविभाजित बिहार की राजनीति में प्रवेश किया। वह 1995 तक विधायक रहे।

इसके बाद वर्ष 1996 में वह पहली बार पलामू लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। वर्ष 1998 और 1999 में भी उन्होंने जीत दर्ज की और लगातार तीन लोकसभाओं में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और पलामू बिहार का हिस्सा था। नवंबर 2000 में झारखंड अलग राज्य बना।

संसद की कई समितियों में निभाई जिम्मेदारी

लोकसभा सदस्य के रूप में ब्रज मोहन राम विभिन्न संसदीय समितियों से जुड़े रहे। इनमें गृह मामलों, ऊर्जा, कोयला, परिवहन, पर्यटन और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण से संबंधित समितियां शामिल थीं।

वर्ष 1996 से 1998 के दौरान वह रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे। संसदीय समितियों में उनकी भागीदारी ने उन्हें अलग-अलग मंत्रालयों और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर काम करने का अनुभव दिया।

झारखंड से ओडिशा के राज्यपाल बनने वाले दूसरे भाजपा नेता

ब्रज मोहन राम की नियुक्ति के साथ झारखंड से जुड़े एक और भाजपा नेता को ओडिशा के राज्यपाल की जिम्मेदारी मिली है। उनसे पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी ओडिशा के राज्यपाल रह चुके हैं।

ब्रज मोहन राम अब राज्यपाल के रूप में संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाएंगे। इस पद पर उनकी नियुक्ति उनके लंबे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय है।

ब्रज मोहन राम के राजनीतिक सफर की प्रमुख तारीखें

  • 1 जनवरी 1958: चंदवा, तत्कालीन पलामू जिले में जन्म।
  • 1991–1995: अविभाजित बिहार की विधानसभा में लातेहार से विधायक।
  • 1996: पहली बार पलामू से लोकसभा सांसद निर्वाचित।
  • 1998: दूसरी बार लोकसभा पहुंचे।
  • 1999: तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए।
  • 12 अक्टूबर 2026: ओडिशा के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति की घोषणा।

अब राज्यपाल के रूप में नई पारी

ब्रज मोहन राम का राजनीतिक सफर स्थानीय क्षेत्र से शुरू होकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है। बिहार विधानसभा और लोकसभा में काम करने के बाद अब उन्हें ओडिशा में संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी मिली है। उनके कार्यभार संभालने के बाद राज्यपाल के रूप में उनका नया कार्यकाल शुरू होगा।

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