माया राजेश्वरन ने तोड़ा सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड, 17 साल की उम्र में रचा इतिहास

By Riya Kumari

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माया राजेश्वरन ने तोड़ा सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड, 17 साल की उम्र में रचा इतिहास

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सोशल संवाद/डेस्क: भारतीय टेनिस की युवा खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 17 साल की माया ने पुर्तगाल में आयोजित ITF W35 लागोस टूर्नामेंट का महिला सिंगल्स खिताब जीतकर सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह W35 स्तर पर सिंगल्स खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं।

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माया ने 11 अक्टूबर 2026 को खेले गए फाइनल में स्पेन की सीलिया सर्विनो रुइज को सीधे सेटों में 6-4, 6-2 से हराया। यह उनके पेशेवर करियर का पहला सिंगल्स खिताब है। खास बात यह रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं गंवाया।

सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड कैसे टूटा?

इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के नाम था। उन्होंने वर्ष 2004 में 17 साल 10 महीने की उम्र में W35 स्तर का सिंगल्स खिताब जीता था।

माया ने 17 साल और 3 महीने की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर सानिया का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उनकी इस जीत को भारतीय महिला टेनिस के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

डबल्स में भी जीता खिताब

माया राजेश्वरन ने इस टूर्नामेंट में सिंगल्स के साथ डबल्स में भी खिताब अपने नाम किया। उन्होंने यूक्रेन की येलीजावेटा कोट्लियार के साथ जोड़ी बनाकर फाइनल में मिन लियू और कार्लोटा मोचिया को हराया।

फाइनल में माया और उनकी जोड़ीदार पहला सेट 0-6 से हार गई थीं। इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरा सेट 6-2 से जीता और निर्णायक सुपर टाईब्रेकर 10-7 से अपने नाम किया। इस तरह माया ने एक ही टूर्नामेंट में दो खिताब जीते।

कौन हैं माया राजेश्वरन?

माया राजेश्वरन रेवती का जन्म तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ। उन्होंने महज 8 साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था। उनके पिता ने उन्हें इस खेल से परिचित कराया और शुरुआती प्रशिक्षण भारत में ही मिला।

आगे चलकर माया ने प्रो सर्व टेनिस एकेडमी में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने स्पेन के मल्लोर्का स्थित राफेल नडाल एकेडमी में भी अभ्यास किया। अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए वह बाद में फ्रांस के कान शहर स्थित एलीट टेनिस सेंटर से जुड़ीं।

जीत से बढ़ा आत्मविश्वास

अपना पहला पेशेवर सिंगल्स खिताब जीतने के बाद माया ने इसे अपने करियर की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन्हें आत्मविश्वास देती है और आगे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।

माया की इस उपलब्धि से भारतीय टेनिस को एक नई युवा प्रतिभा मिली है। अब उनके प्रदर्शन पर प्रशंसकों और टेनिस जगत की नजरें रहेंगी।

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