सोशल संवाद/डेस्क: ओडिशा के बरहमपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दो सिर वाले दुर्लभ जुड़वां शिशु का जन्म हुआ है। नवजात के दो सिर और दो रीढ़ की हड्डियां हैं, जबकि शरीर और हृदय एक ही है। बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम उसे विशेष निगरानी में रखकर इलाज कर रही है।
यह भी पढे : Tamil Nadu: फॉलोअर्स से मांगी दिवाली की मिठाई, घर पहुंचने लगे ₹1.69 लाख के TV और फ्रिज के फर्जी ऑर्डर
कंधमाल जिले की महिला ने दिया बच्चे को जन्म
रिपोर्ट के अनुसार, कंधमाल जिले के तुमुड़िबंध क्षेत्र की रहने वाली रुनी माझी को प्रसव के लिए एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला ने 11 अक्टूबर को ऑपरेशन के जरिए बच्चे को जन्म दिया। यह दंपती की पहली संतान है।
जन्म के बाद नवजात की असामान्य शारीरिक संरचना सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती कर दिया, जहां उसकी सांस और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतों पर नजर रखी जा रही है।
दो सिर, दो रीढ़ की हड्डियां और साझा अंग
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की स्थिति को चिकित्सा विज्ञान में डाइसिफैलिक पैरापैगस (Dicephalic Parapagus) कहा जाता है। यह संयुक्त जुड़वां बच्चों का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें दो सिर एक ही धड़ से जुड़े होते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवजात के दो सिर और दो रीढ़ की हड्डियां हैं, जबकि हृदय और कुछ अन्य अंग साझा हैं। ऐसे मामलों में शरीर की आंतरिक संरचना अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इलाज की संभावनाओं का आकलन विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद ही किया जा सकता है।
हालत गंभीर, विशेषज्ञ कर रहे निगरानी
नवजात को सांस लेने में परेशानी होने की खबर है। अस्पताल के डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञों की टीम विस्तृत जांच के आधार पर आगे के इलाज को लेकर निर्णय लेगी। जरूरत पड़ने पर बच्चे को बेहतर इलाज के लिए भुवनेश्वर स्थित एम्स या किसी अन्य बड़े अस्पताल में भेजने पर भी विचार किया जा सकता है।
आर्थिक स्थिति को लेकर परिवार चिंतित
रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चे के पिता त्रिलोचन माझी दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है और नवजात के इलाज को लेकर परिजन चिंतित हैं। फिलहाल परिवार की प्राथमिकता बच्चे को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के दुर्लभ मामलों में इलाज और आगे की स्थिति का अनुमान बच्चे के अंगों की संरचना, उनके काम करने की क्षमता और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं की जांच के बाद ही लगाया जा सकता है।











