सोशल संवाद/डेस्क : केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले रेलवे के करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस देने की मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस पर करीब ₹2,009 करोड़ खर्च होंगे। बुधवार को कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया।
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इसके अलावा, सरकार ने तीन पेंशन योजनाओं से इंदिरा गांधी का नाम हटाकर उनमें प्रधानमंत्री शब्द जोड़ने का फैसला किया है। दिव्यांगों की पेंशन नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब दिव्यांगों को जन्म से पेंशन मिलेगी। कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला भी लिया है।
1. रेल कर्मियों के बोनस की गणना के लिए ₹7,000 वेतन सीमा
रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा ₹7,000 तय की गई है। इसी आधार पर 78 दिन के बोनस की अधिकतम रकम ₹17,951 बनती है।
बोनस का कैलकुलेशन:
₹7,000 × 12 × 78 ÷ 365 = ₹17,951
यह अधिकतम गणना की रकम है। हर कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक बोनस उसकी पात्रता और लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकता है।
बोनस पाने वालों में ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, टेक्नीशियन, टेक्नीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, मंत्रालयीन कर्मचारी और अन्य ग्रुप-C कर्मचारी शामिल हैं।
2. दिव्यांगता की पात्रता सीमा 80% से घटाकर 40%
नई व्यवस्था में बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 80% से घटाकर 40% की गई है। इससे निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले अधिक दिव्यांग लोग पेंशन के पात्र बन सकेंगे।
0 से 79 साल की उम्र के पात्र दिव्यांगों को हर महीने ₹375 मिलेंगे। 80 साल या उससे अधिक उम्र के पात्र लोगों को हर महीने ₹625 दिए जाएंगे।
पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी किए जाएंगे और लागू किए जाएंगे।
दिव्यांगों की पात्रता में बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार किया गया है। इस कानून में बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 40% तय है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिव्यांगों के लिए सहायता राशि तुलनीय श्रेणियों की योजनाओं से कम से कम 25% अधिक रखने का प्रावधान भी है।
3. सामाजिक सहायता कार्यक्रम पर ₹53,428 करोड़ खर्च होंगे
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी मिली है। इस पर पांच साल में ₹53,428 करोड़ खर्च होंगे। इससे करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को बुनियादी आर्थिक सहायता देना है।
यह कार्यक्रम संविधान के अनुच्छेद 41 में दिए गए राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों से जुड़ा है। इसके तहत केंद्र सरकार 100% वित्तीय सहायता देती है, ताकि पात्र लाभार्थियों को देशभर में सहायता मिल सके।
इस कार्यक्रम में बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन, दिव्यांग पेंशन और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु पर आर्थिक सहायता जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। अन्नपूर्णा योजना के तहत ऐसे पात्र बुजुर्गों को अनाज देने का भी प्रावधान है, जिन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है।











