सोशल संवाद / रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (पारा कोटि) 2026 में शामिल होने की अनुमति मांग रहे पारा शिक्षकों को झारखंड हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने ऋषिकांत तिवारी समेत 26 याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को शिक्षा विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देकर अपना पक्ष रखने की छूट दी है।
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यह मामला उन पारा शिक्षकों से जुड़ा है, जो निर्धारित शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने की शर्त को लेकर JSSC की भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति चाहते हैं।
JSSC परीक्षा में शामिल होने के लिए क्या है शर्त?
प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि वे इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक भर्ती परीक्षा के तहत कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षक पदों के लिए आयोजित परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं। हालांकि, JSSC के विज्ञापन में निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार अभ्यर्थियों के लिए झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) अथवा पड़ोसी राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना आवश्यक बताया गया है।
इसी पात्रता शर्त के कारण संबंधित पारा शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
शिक्षा विभाग के समक्ष पक्ष रखने की मिली छूट
हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन याचिकाकर्ताओं को शिक्षा विभाग के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। इसके जरिए वे अपनी मांग और समस्या विभाग के सामने रख सकते हैं।
अब इस मामले में संबंधित पारा शिक्षकों की आगे की कार्रवाई शिक्षा विभाग के समक्ष रखे जाने वाले अभ्यावेदन और उस पर होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।
झारखंड के करीब 50 हजार पारा शिक्षकों का मामला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, झारखंड में लगभग 50 हजार पारा शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें करीब 5 हजार शिक्षक ही JTET पास हैं, जबकि लगभग 45 हजार ने JTET पास नहीं किया है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़ी शर्त ऐसे पारा शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो नई भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं। हालांकि, इस मामले में CTET या पड़ोसी राज्यों की TET परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता भी JSSC के विज्ञापन में दी गई शर्तों के अनुसार देखी जाएगी।
फिलहाल हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं के पास शिक्षा विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखने का विकल्प है।











