सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू धर्म के संरक्षण का सबसे बड़ा काम कियाःसरयू राय

By Tamishree Mukherjee

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The Supreme Court has performed the greatest service for the preservation of Hinduism

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि धर्मांतरण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला स्वागतयोग्य है। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू धर्म के संरक्षण का सबसे बड़ा काम किया है।
यहां एक पंडाल के उद्घाटन के बाद सरयू राय ने कहा कि यह खेद का विषय है कि हिंदू धर्म के जो घोर विरोधी हैं, वो भी डांडिया और गरबा करवा रहे हैं। यह गलत है। अगर वो डांडिया और गरबा के समर्थक हैं तो क्यों नहीं अपने परिवार के सदस्यों को लेकर आते हैं और डांडिया और गरबा खेलते हैं? उन्होंने इसे ‘एकतरफा’ बताते हुए कहा कि जो ‘एकतरफा’ होता है, उसे हम लोग जानते हैं कि ‘क्या कहा जाता है।‘

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सरयू राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वह कार्य कर दिया, जो हमारे देश की संसद भी नहीं कर सकी। इसके लिए हम लोग वर्षों से प्रयारत थे, आंदोलन कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक मुकदमे के फैसले में कहा कि अगर हिंदू धर्म से पलायन करके कोई व्यक्ति अगर दूसरे धर्म में जाता है तो उसकी वो सारी सुविधाएं समाप्त हो जाएंगी, जो उसे हिंदू धर्म में रहते हुए मिलती थीं।

उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि आदिवासी इलाकों में क्रिश्चियन धर्म और इस्लाम को मानने वालों की संख्या बढ़ गई है और इसका शिकार हिंदू हो रहे हैं। सरयू राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के पक्ष में सभी को आवाज उठानी चाहिए और अपने मन को मजबूत करना चाहिए।

राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी ने हिंदू धर्म को छोड़ दिया और वह वापस अपने धर्म में आना चाहता है तो ऐसी स्थिति में भी उसे पुरानी सुविधाएं वापस नहीं मिलेंगी। ऐसे लोग, जो किन्ही कारणों से धर्म बदलते रहे हैं, उन्हें अब सोचना होगा कि उनके धर्म परिवर्तन करने से भी स्वार्थ पूरा नहीं होगा।
सरयू राय ने कहा कि शहर में अनेक स्थानों पर डांडिया का आयोजन हो रहा है। उन्होंने खेद जताते हुए कि डांडिया और गरबा धार्मिक कार्यक्रम है। हम लोग उसे मनोरंजन की तरह ले रहे हैं। गरबा और डांडिया मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं हैं। उन्होंने विभिन्न संचार माध्यमों का हवाला देते हुए कहा कि डांडिया और गरबा धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम हैं। इसे हमें अपने सनातन परंपरा के अनुसार ही मनाना चाहिए।

सरयू राय ने कहा कि पूजा के उपरांत मां की प्रतिमा के विसर्जन कार्यक्रम में स्थिति तब लज्जाजनक हो जाती है, जब हम लोग देखते हैं कि कई समूह होश में ही नहीं रहते। डीजे बजाकर वैसे गीत गाए-बजाए जाते हैं, जो हमारी परंपरा के अनुरूप नहीं हैं। अगर हम सभी विसर्जन में भी मां दुर्गा के ही गीत गाएं या बजाएं तो कितना अच्छा होगा। कई श्लोक हैं, जिन्हें हम लोग सस्वर पढ़ें तो वो किसी गीत से कम नहीं हैं। उनका संकलन होना चाहिए और डीजे के माध्यम से उन्हें भी बजाया जाना चाहिए। नई पीढ़ी अपने भीतर साहस व शक्ति भरे और सनातन परंपरा को हर पूजा में अपनाए। इसे उत्सव का नहीं बल्कि पूजा और धार्मिक उपासना का रुप दें।

जो मां दुर्गा पर खुल कर आस्था नहीं जता सकते, वो किस उद्देश्य से डांडिया-गरबा में शामिल होना चाहते हैं?
एक सोशल मीडिया साइट पर सरयू राय ने लिखाः मैंने प्रश्न पूछा और गूगल ने जवाब दिया कि हाँ, गरबा और डांडिया मूल रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव हैं, जिनका सीधा संबंध हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व नवरात्रि और माँ दुर्गा (शक्ति) की उपासना से है। इसकी ओर मैंने जमशेदपुर के जवाबदेह अधिकारियों का ध्यान तब खींचा, जब कतिपय लोग मेरे पास डांडिया नाइट आयोजन कराने की प्रशासनिक अनुमति के लिए पैरवी कराने आए।

आयोजकों से भी मैंने कहा कि धार्मिक उत्सव को तमाशा मत बनाइए। जो धर्म हिन्दू और हिन्दुत्व विरोधी हैं, उनके अनुयायियों को इसमें शामिल होने अथवा इसका आयोजन करने की अनुमति देना नादानी और बेवकूफी है। जो लोग अपने परिवार की कन्याओं को नक़ाब हटाकर हिन्दू धर्म के ऐसे आयोजनों में साथ लेकर नहीं आ सकते, उन्हें इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं दे सकते, मां दुर्गा पर खुलकर आस्था नहीं व्यक्त कर सकते, वे आख़िर हिन्दुत्व और माँ दुर्गा के इस पूजनोत्सव कार्यक्रम में क्यों और किस उद्देश्य से शामिल होना चाहते हैं? प्रशासन सोचे कि इसका सामाजिक सद्भाव पर क्या असर होगा?

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