सोशल संवाद / डेस्क : टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर विवाद के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नियमों को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RBI के नियमों के दायरे में आने वाली और अपर-लेयर श्रेणी में रखी गई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य है। उनका यह बयान टाटा संस की संभावित लिस्टिंग पर चल रही चर्चा के बीच आया है।
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अपर-लेयर NBFC को लिस्ट होना जरूरी
23 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित NDTV World Summit 2026 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा से टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने किसी खास कंपनी के मामले पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन नियमों को स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी RBI की परिभाषा के अनुसार NBFC और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) है और उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फंड उपलब्ध हैं, तो उसे RBI में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि ऐसी कंपनी अपर-लेयर श्रेणी में आती है, तो उसके लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग जरूरी है।
RBI को क्यों जरूरी लगता है रजिस्ट्रेशन?
कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियां मुख्य रूप से अपने समूह की दूसरी कंपनियों में निवेश करती हैं। RBI के मुताबिक, ऐसी बड़ी कंपनियां समूह के शीर्ष पर होती हैं और फंड जुटाने के लिए समूह की कंपनियों की बैलेंस शीट का इस्तेमाल कर सकती हैं।
ऐसी स्थिति में बैंक लोन, कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य माध्यमों से जुटाए गए सार्वजनिक धन पर जोखिम पैदा हो सकता है। इसी वजह से RBI ऐसी कंपनियों के रजिस्ट्रेशन और नियामकीय निगरानी को जरूरी मानता है। हालांकि, गवर्नर ने कहा कि जिन CIC के पास प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक फंड तक पहुंच नहीं है, उन्हें रजिस्ट्रेशन से छूट मिल सकती है।
टाटा संस की लिस्टिंग पर क्यों बढ़ी चर्चा?
टाटा संस को सितंबर 2022 में अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंपनी ने मार्च 2024 में RBI से अपना CIC रजिस्ट्रेशन वापस लेने का अनुरोध किया था और इस उद्देश्य से अपना कर्ज भी चुकाया था। लेकिन RBI ने हाल ही में रजिस्ट्रेशन छोड़ने की उसकी अर्जी खारिज कर दी।
RBI के नियमों के तहत अपर-लेयर NBFC को वर्गीकरण के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना होता है। इस वजह से टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
टाटा ट्रस्ट्स और शापूरजी पलोनजी समूह के बीच मतभेद
टाटा संस की लिस्टिंग के मुद्दे पर टाटा समूह के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है। वहीं, टाटा संस में 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पलोनजी समूह लिस्टिंग का समर्थन करता है।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के टाटा संस में विलय का प्रस्ताव रखा है। ट्रस्ट्स का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से कंपनी की नियामकीय स्थिति बदल सकती है। इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया और RBI की भूमिका अहम रहेगी।










