सोशल संवाद / रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID की चार्जशीट में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा का परिणाम आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही चयनित अभ्यर्थियों की जानकारी WhatsApp पर साझा की गई थी। मामले में परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और OMR शीट में कथित हेराफेरी से संबंधित साक्ष्य रांची की विशेष अदालत में पेश किए गए हैं।
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रिजल्ट से पहले WhatsApp पर साझा हुआ 267 अभ्यर्थियों का डेटा
CID की चार्जशीट के अनुसार, JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TSR Data Processing Private Limited के कर्मचारी उस्मान के साथ WhatsApp पर परीक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी साझा की थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस जानकारी में कुल 267 चयनित अभ्यर्थियों का डेटा शामिल था। इनमें दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, बिहार के 146, उत्तर प्रदेश के 82 और हरियाणा के 14 अभ्यर्थियों की जानकारी सामने आई है।
CID ने अदालत को बताया कि परीक्षा परिणाम लीक करने के कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
प्रश्न-उत्तर और OMR शीट से जुड़ी जानकारी भी साझा करने का आरोप
चार्जशीट में केवल चयनित अभ्यर्थियों के डेटा साझा करने की बात नहीं है। CID के अनुसार, WhatsApp चैट में 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े प्रश्न और उत्तर भी साझा किए गए थे।
इसके अलावा OMR शीट के पुनर्मूल्यांकन, अभ्यर्थियों के रोल नंबर और सफल अभ्यर्थियों की श्रेणीवार तथा कोटिवार संख्या से संबंधित जानकारी के आदान-प्रदान का भी उल्लेख है। इन तथ्यों को जांच एजेंसी ने कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच से जुड़े साक्ष्यों के रूप में अदालत में पेश किया है।
कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बातचीत का विवरण
CID ने चार्जशीट में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से जुड़ी जानकारियों का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और JPSC कर्मचारी सोनू कुमार के बीच 14 अगस्त 2024 से 18 जुलाई 2026 तक 635 बार बातचीत हुई थी।
वहीं, श्वेता गुप्ता और परीक्षा एजेंसी के कर्मचारी उस्मान के बीच 17 जून 2025 से 21 जुलाई 2026 के दौरान 674 बार बातचीत का विवरण सामने आया है। चार्जशीट में तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते और श्वेता गुप्ता के बीच भी कई बार बातचीत होने का उल्लेख है।
जांच एजेंसी ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य कर्मचारियों के कॉल रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किए हैं। हालांकि, केवल फोन पर बातचीत होना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता साबित नहीं करता।
तत्कालीन JPSC अध्यक्ष को लेकर भी आरोप
चार्जशीट में JPSC के वर्तमान सचिव के निजी सहायक अरुण कुमार का बयान भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कार्यकाल में परीक्षा संचालन के दौरान नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए हैं। बयान में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और गोपनीय शाखा के कर्मचारी सोनू कुमार की भूमिका का भी उल्लेख है।
ये आरोप जांच से संबंधित बयानों का हिस्सा हैं। संबंधित आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जारी
JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े मामले में कथित पेपर लीक, गोपनीय डेटा साझा करने और OMR शीट में हेराफेरी जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। CID ने अपनी चार्जशीट में WhatsApp चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड सहित कई साक्ष्यों का उल्लेख किया है।
अब मामले में अदालत के समक्ष पेश साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।










