सोशल संवाद / चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और जलाशयों में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन के उद्देश्य से मौदी डैम में 90 हजार मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन किया गया। इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस सह प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सदर चाईबासा, सुश्री ईरा जोरवाल उपस्थित रहीं।
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इस पहल का उद्देश्य डैम में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाना और मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करना है। इससे स्थानीय स्तर पर मछली उत्पादन बढ़ने के साथ मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
रोहू, कतला और मृगल की 70 हजार अंगुलिकाएं छोड़ी गईं
मौदी डैम में कुल 90 हजार मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन किया गया। इनमें 70 हजार भारतीय मेजर कार्प (IMC) प्रजाति की अंगुलिकाएं शामिल हैं। इस श्रेणी में रोहू, कतला और मृगल मछलियां आती हैं।
इसके अलावा, डैम में 20 हजार ग्रास कार्प की अंगुलिकाएं भी छोड़ी गईं। इन प्रजातियों के संचयन से जलाशय में मत्स्य संसाधनों को विकसित करने और मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
मत्स्य पालन से स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
मौदी डैम में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन जिले में मत्स्य संसाधनों के विकास की दिशा में एक पहल है। इससे भविष्य में जलाशय में मछलियों की उपलब्धता बढ़ सकती है और स्थानीय मत्स्य पालकों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
मत्स्य उत्पादन में वृद्धि से रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की भी संभावना है। यह पहल पश्चिमी सिंहभूम में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।










