सोशल संवाद / रांची: झारखंड में 631 सरकारी डॉक्टरों को लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित बताकर सेवा से हटाने की तैयारी की जा रही है। लेकिन इस कार्रवाई को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। कुछ डॉक्टरों के वास्तव में मरीजों का इलाज करने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में अनुपस्थित दर्ज होने की बात सामने आई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयार सूची की सटीकता और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई चर्चा में है।
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631 डॉक्टरों को 15 दिनों में देना होगा सेवा का प्रमाण
झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने लंबे समय से अनुपस्थित बताए जा रहे 631 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर सेवा में होने का प्रमाण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। विभाग की ओर से जिलों से डॉक्टरों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद कुल 695 चिकित्सकों के लंबे समय से ड्यूटी से गायब रहने का मामला सामने आया।
इनमें 631 डॉक्टरों को सेवा में होने का प्रमाण देने को कहा गया है, जबकि अन्य 64 डॉक्टरों से लंबे समय से अनधिकृत अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब या प्रमाण नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कार्यरत डॉक्टरों के नाम सूची में होने पर चिंता
इस मामले में डॉक्टरों के संगठन ने भी सूची की जांच और सही तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है। झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विस एसोसिएशन (झासा) के अध्यक्ष डॉ. बिमलेश सिंह के मुताबिक, लंबे समय से ड्यूटी से गायब डॉक्टरों पर कार्रवाई करने में संगठन को आपत्ति नहीं है। हालांकि, जो चिकित्सक नियमित रूप से अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे हैं, उनके नाम गलती से अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची में शामिल नहीं होने चाहिए।
यदि किसी कार्यरत डॉक्टर का नाम सूची में गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो उसे स्वास्थ्य विभाग के समक्ष प्रमाण के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि रिकॉर्ड में सुधार किया जा सके।
695 डॉक्टरों में 631 पर सेवा समाप्ति की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग के सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कुल 695 चिकित्सकों को लंबे समय से अनुपस्थित पाया गया है। इनमें से 631 डॉक्टरों को सेवा में होने का प्रमाण देने का अवसर दिया गया है। बाकी 64 चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
यदि संबंधित डॉक्टर निर्धारित अवधि में अपना पक्ष और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इस कार्रवाई के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग की मंजूरी और राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति की प्रक्रिया भी जरूरी बताई गई है।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करना चुनौती
झारखंड के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता लंबे समय से एक अहम मुद्दा रही है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य ऐसे पदों पर डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित करना है, जहां नियुक्ति के बावजूद चिकित्सक योगदान नहीं दे रहे या लंबे समय से अनुपस्थित हैं।
विभाग रिक्त पदों पर नई नियुक्तियों की दिशा में भी प्रयास कर रहा है। हालांकि, कार्रवाई से पहले सूची में शामिल डॉक्टरों की वास्तविक सेवा स्थिति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि लंबे समय से अनुपस्थित कर्मियों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई हो और नियमित रूप से मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ गलत कार्रवाई न हो।










