सोशल संवाद/डेस्क : आज के दौर में IT, फार्मास्यूटिकल, हेल्थकेयर और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में तेजी से रोजगार बढ़ रहा है। बेहतर करियर और सुविधाओं की तलाश में बड़ी संख्या में युवा शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, लगातार बढ़ता तनाव, अनियमित खान-पान और नींद की कमी उनकी सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर और हृदय रोग जैसी समस्याएं कई बार धीरे-धीरे विकसित होती हैं। शारीरिक गतिविधियों की कमी और अस्वस्थ जीवनशैली इनके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में अगर आप भी रोजाना 8 घंटे की शिफ्ट में डेस्क पर बैठकर काम करते हैं, तो अपनी दिनचर्या में कुछ आसान बदलाव करके सेहत का बेहतर ध्यान रख सकते हैं।
डेस्क जॉब से सेहत पर कैसे पड़ता है असर?
लगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करने से शरीर की शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। इसके साथ ही काम का दबाव, समय पर भोजन न करना, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल और पर्याप्त नींद नहीं लेना स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं, लगातार तनाव और नींद की कमी का असर मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव अलग-अलग होता है। अच्छी बात यह है कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव करके इन जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
डेस्क जॉब करने वाले कर्मचारियों के लिए 5 जरूरी हेल्थ टिप्स
1. हर 30 से 60 मिनट में अपनी सीट से उठें
अगर आपका ज्यादातर समय कंप्यूटर के सामने बैठकर गुजरता है, तो लगातार कई घंटों तक एक ही स्थिति में न बैठें। हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर खड़े हों, थोड़ा टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें। फोन पर बात करते समय चलने की आदत भी फायदेमंद हो सकती है।
लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और ऑफिस के छोटे कामों के लिए पैदल चलना भी शारीरिक गतिविधि बढ़ाने के आसान तरीके हैं। इसके अलावा, अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित व्यायाम के लिए समय निकालें। वयस्कों के लिए सामान्य लक्ष्य सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि है।
2. खान-पान को बनाएं संतुलित
ऑफिस में काम के दौरान बाहर का खाना, तली-भुनी चीजें, मीठे पेय और पैकेट वाले स्नैक्स खाना आसान विकल्प लग सकता है। लेकिन इनका बार-बार सेवन संतुलित आहार की जगह लेने लगे, तो वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
अपनी डाइट में घर का बना खाना, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। भोजन में सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं और अपनी जरूरत के अनुसार अंडे, दाल, दूध, चिकन या मछली जैसे प्रोटीन स्रोत चुनें।
ऑफिस में पानी की बोतल साथ रखें। भूख लगने पर फल, बिना ज्यादा नमक वाले मेवे या अन्य पौष्टिक स्नैक्स चुन सकते हैं। मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।
3. रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लें
काम का दबाव और देर रात तक स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदत नींद का समय कम कर सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक खराब नींद रहने पर स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अधिकांश वयस्कों को नियमित रूप से 7 से 9 घंटे की नींद लेने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए सोने और जागने का समय तय करें, सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करें और बेडरूम का माहौल शांत रखें।
अगर लगातार नींद नहीं आती या दिनभर अत्यधिक थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
4. ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं
बाहर से स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति भी हाई ब्लड प्रेशर या बढ़े हुए ब्लड शुगर जैसी समस्याओं से प्रभावित हो सकता है। कई बार इन स्थितियों के शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
इसलिए अपनी उम्र, पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जोखिम कारकों के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन की नियमित जांच कराएं। डॉक्टर की सलाह के आधार पर जरूरी जांच और उनकी आवृत्ति तय करें।
समय पर समस्या का पता चलने से उचित सलाह, जीवनशैली में बदलाव और जरूरत पड़ने पर उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
5. मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें
लगातार काम का दबाव, समयसीमा पूरी करने की चिंता, लंबे वर्किंग ऑवर्स और निजी जीवन के लिए समय न मिलना मानसिक तनाव बढ़ा सकता है। इसका असर नींद, एकाग्रता, व्यवहार और रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
काम के बीच छोटे ब्रेक लें, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं और अपनी दिनचर्या में आराम तथा पसंदीदा गतिविधियों को जगह दें। जरूरत महसूस होने पर किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने में संकोच न करें।
लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, चिड़चिड़ापन या नींद की परेशानी को केवल ऑफिस के तनाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
कर्मचारियों की सेहत के लिए कंपनियों को क्या करना चाहिए?
कर्मचारियों की सेहत बनाए रखना केवल उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। ऑफिस का माहौल और काम करने की व्यवस्था भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। कंपनियां कुछ कदम उठाकर स्वस्थ कार्यस्थल बनाने में मदद कर सकती हैं।
नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग: कर्मचारियों को उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के अनुसार जरूरी जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जांच में किसी समस्या का संकेत मिलने पर उन्हें डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जा सकती है।
आरामदायक वर्कस्टेशन: ऑफिस में कुर्सी, डेस्क और कंप्यूटर की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि कर्मचारी आरामदायक मुद्रा में काम कर सकें। चलने-फिरने और सीढ़ियों के इस्तेमाल के लिए भी सुविधाजनक व्यवस्था होनी चाहिए।
स्वस्थ भोजन के विकल्प: ऑफिस कैंटीन में पौष्टिक भोजन, फल और कम चीनी वाले पेय उपलब्ध कराना कर्मचारियों को बेहतर विकल्प चुनने में मदद कर सकता है।
काम और निजी जीवन के बीच संतुलन: स्पष्ट शिफ्ट शेड्यूल, उचित कार्यभार और समय पर काम समाप्त करने की संस्कृति कर्मचारियों को पर्याप्त आराम और नींद लेने का अवसर देती है।
मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता: कर्मचारियों को तनाव प्रबंधन, जरूरत के अनुसार अवकाश और मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। स्वास्थ्य जांच या बीमारी के कारण छुट्टी लेने वाले कर्मचारियों को नकारात्मक नजर से नहीं देखना चाहिए।
लगातार स्वास्थ्य जागरूकता: केवल साल में एक बार हेल्थ कैंप आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। कंपनियों को नियमित रूप से स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, शारीरिक गतिविधियों और तनाव प्रबंधन को बढ़ावा देना चाहिए।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है सबसे बेहतर निवेश
डेस्क जॉब करना अपने आप में बीमारी की वजह नहीं है, लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय रहना, असंतुलित खान-पान, नींद की कमी और लगातार तनाव स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए अपनी दिनचर्या में नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को शामिल करना जरूरी है।
तंबाकू से दूरी बनाना, शराब से परहेज करना या उसका सेवन सीमित रखना, जरूरत के अनुसार टीकाकरण कराना और नियमित स्वास्थ्य जांच भी बेहतर सेहत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कंपनियों को भी ऐसा कार्यस्थल बनाने पर ध्यान देना चाहिए, जहां कर्मचारियों को अपनी सेहत और करियर के बीच चुनाव न करना पड़े। आखिरकार, स्वस्थ कर्मचारी न केवल अपने जीवन की गुणवत्ता बेहतर बना सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक अधिक प्रभावी ढंग से काम भी कर सकते हैं।










