राजस्व बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए बनेगा IRIS सिस्टम, सरकार ने नई कंपनी से किया समझौता

By Riya Kumari

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राजस्व बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए बनेगा IRIS सिस्टम, सरकार ने नई कंपनी से किया समझौता

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सोशल संवाद / रांची : झारखंड में राजस्व संग्रहण बढ़ाने और टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार तकनीक आधारित नई व्यवस्था विकसित करने जा रही है। इसके तहत वाणिज्य-कर विभाग ने नई सिस्टम इंटीग्रेटर कंपनी च्वाइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Choice Consultancy Services Pvt. Ltd.) के साथ समझौता किया है। इस समझौते के तहत राज्य में इंटीग्रेटेड रेवेन्यू इंटेलिजेंस सिस्टम (IRIS) विकसित किया जाएगा।

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गुरुवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की मौजूदगी में यह एकरारनामा संपन्न हुआ। कंपनी का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। सरकार का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।

छह महीने में विकसित होगा IRIS सिस्टम

वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार के अनुसार, IRIS के तहत राजस्व संग्रहण से जुड़े विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल और आईटी एप्लीकेशन को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। इन विभागों से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिजनेस इंटेलिजेंस (BI) टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा।

इससे संभावित टैक्स चोरी और राजस्व के नुकसान की पहचान करने में मदद मिलेगी। सिस्टम से मिलने वाली जानकारी के आधार पर संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकेंगे। इस परियोजना को छह महीने में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अगले तीन वर्षों तक इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।

इन विभागों के पोर्टल होंगे एकीकृत

IRIS प्रणाली के तहत कई विभागों के ऑनलाइन पोर्टल को API इंटीग्रेशन के जरिए जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • GSTN और खान एवं भूतत्व विभाग का JIMMS पोर्टल
  • परिवहन विभाग का VAHAN पोर्टल
  • कार्य एवं आईटी विभाग का WAMIS पोर्टल
  • राजस्व विभाग का भूमि पंजीकरण पोर्टल
  • नगर विकास विभाग का प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल
  • श्रम विभाग का लेबर सेस पोर्टल
  • उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का राजस्व पोर्टल
  • ट्रेड लाइसेंस और झारखंड प्रोफेशनल टैक्स (JPT) पोर्टल
  • बिजली बिल और झारखंड इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी (JED) पोर्टल

इन पोर्टलों के एकीकरण से अलग-अलग विभागों के राजस्व संबंधी आंकड़ों का समेकित विश्लेषण किया जा सकेगा।

वित्तीय आत्मनिर्भरता के लिए राजस्व बढ़ाने पर जोर

समझौते के दौरान वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य की वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत करने के लिए अपने संसाधनों से राजस्व संग्रहण बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की आर्थिक नीतियों के कारण झारखंड को करीब 22 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।

मंत्री के अनुसार, MMDR एक्ट के कारण लगभग 14 हजार करोड़ रुपये और GST सुधारों तथा मनरेगा के तहत अनुदान में कमी से करीब चार-चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ये आंकड़े मंत्री की ओर से प्रस्तुत किए गए दावे हैं।

राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की पहल

च्वाइस कंसल्टेंसी सर्विसेज के प्रतिनिधि सुभाष पाठक ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तावित प्रणाली की तकनीकी संरचना और क्रियान्वयन की जानकारी दी। सरकार को उम्मीद है कि विभागीय पोर्टलों के एकीकरण से संभावित गड़बड़ियों की पहचान आसान होगी और राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

कार्यक्रम में संयुक्त सचिव पूनम कुजूर, राज्य-कर अपर आयुक्त दिलीप कुमार मंडल, जीवनारायण मंडल सहित विभागीय अधिकारी और कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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