सोशल संवाद / डेस्क : Tata Group Dispute: टाटा समूह के भीतर कारोबार के पुनर्गठन और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन Noel Tata ने Tata Sons के बोर्ड को दो अलग-अलग पत्र लिखकर अहम प्रस्तावों पर चर्चा और मतदान कराने की मांग की है। इनमें Tata Sons के पुनर्गठन और शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप को ₹25,000 करोड़ के भुगतान से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। दोनों मुद्दों को 26 नवंबर 2026 को होने वाली बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल करने की मांग की गई है।
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Tata Sons का पुनर्गठन क्यों करना चाहते हैं Noel Tata?
Noel Tata के पहले प्रस्ताव में Tata Electronic Systems Solutions और Tata Consulting Engineers का Tata Sons में विलय करने की बात कही गई है। ये दोनों कंपनियां टाटा समूह की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनियां हैं।
प्रस्ताव का उद्देश्य Tata Sons को केवल होल्डिंग कंपनी के बजाय सीधे कारोबारी गतिविधियों में शामिल कंपनी बनाना है। इससे उसकी नियामकीय श्रेणी बदलने और शेयर बाजार में अनिवार्य लिस्टिंग से बचने का रास्ता निकल सकता है। हालांकि, इस योजना को लागू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की प्रक्रिया जरूरी होगी।
RBI के फैसले से क्यों जुड़ा है पूरा मामला?
टाटा Sons की लिस्टिंग का मुद्दा RBI के नियामकीय फैसले से जुड़ा है। 11 सितंबर 2026 को RBI ने टाटा Sons की ओर से अपना पंजीकरण स्वेच्छा से वापस करने की मांग स्वीकार नहीं की थी। केंद्रीय बैंक ने कंपनी को NBFC-Upper Layer से जुड़े नियमों का पालन करने की सलाह दी थी।
इसी के बाद टाटा Sons के पुनर्गठन का प्रस्ताव सामने आया है। टाटा समूह के भीतर इस बात को लेकर मतभेद भी हैं कि कंपनी को निजी रखा जाए या शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाए।
SP Group के ₹25,000 करोड़ के प्रस्ताव पर क्या है Noel Tata की मांग?
दूसरा प्रस्ताव SP Group की टाटा Sons में मौजूद हिस्सेदारी से जुड़ा है। SP Group अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर कम से कम ₹25,000 करोड़ जुटाना चाहता है। Noel टाटा ने सुझाव दिया है कि Tata Sons चुनिंदा शेयरों को वापस खरीदकर रद्द करे। इसे Selective Capital Reduction कहा जाता है।
प्रस्ताव के अनुसार, यह भुगतान 18 महीने के भीतर दो या उससे अधिक किस्तों में किया जा सकता है। इसके लिए कंपनी आंतरिक नकदी, सूचीबद्ध कंपनियों में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने और नए कारोबार में निवेशक लाने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। इस प्रक्रिया के लिए NCLT और शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी।
Tata Group में पहले से चल रहा है मतभेद
टाटा Sons की लिस्टिंग और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर पहले भी बोर्ड में मतभेद सामने आ चुके हैं। 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन को पांच साल का कार्यकाल देने और लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला हुआ था। Noel Tata ने उस समय चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव का विरोध किया था।
अब Noel टाटा के नए पत्रों से 26 नवंबर की बोर्ड बैठक महत्वपूर्ण हो गई है। इस बैठक में पुनर्गठन और SP Group की हिस्सेदारी से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, फिलहाल दोनों प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाली बोर्ड बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा और मतदान से टाटा Sons के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका हो सकती है। एक ओर कंपनी की नियामकीय स्थिति और लिस्टिंग का सवाल है, तो दूसरी ओर SP Group की हिस्सेदारी से जुड़े वित्तीय समाधान की चुनौती है। फिलहाल सभी की नजर 26 नवंबर की बैठक पर टिकी है।










