Petrol-Diesel Export Duty: पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी जीरो, डीजल और हवाई ईंधन पर बढ़ा टैक्स

By Riya Kumari

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Petrol-Diesel Export Duty: पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी जीरो, डीजल और हवाई ईंधन पर बढ़ा टैक्स

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सोशल संवाद / डेस्क : केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। 31 अक्टूबर 2026 से लागू नई दरों के तहत Petrol के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। वहीं डीजल और विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, ये बदलाव अगले पखवाड़े के लिए लागू किए गए हैं।

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Sunrise Enclave

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। आइए जानते हैं पेट्रोल, डीजल और ATF की नई एक्सपोर्ट ड्यूटी कितनी तय की गई है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।

Petrol, डीजल और ATF की नई एक्सपोर्ट ड्यूटी

सरकार ने तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में अलग-अलग बदलाव किए हैं।

पेट्रोलियम उत्पादपहले शुल्कनया शुल्क
पेट्रोल₹2.50 प्रति लीटरशून्य
डीजल₹8.50 प्रति लीटर₹11.50 प्रति लीटर
ATF (विमान ईंधन)₹10.50 प्रति लीटर₹11 प्रति लीटर

नई दरों के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर शुल्क में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं ATF पर शुल्क 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया है। दूसरी ओर पेट्रोल के निर्यात पर पहले लगने वाला 2.50 रुपये प्रति लीटर का शुल्क खत्म कर दिया गया है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का सीधा मतलब यह नहीं है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इसलिए फिलहाल इस फैसले से पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे बदलाव नहीं होगा। यह शुल्क मुख्य रूप से विदेशों में भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होता है।

सरकार ने क्यों बदली एक्सपोर्ट ड्यूटी?

पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल तथा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार निर्यात शुल्क की समीक्षा कर रही है।

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो रिफाइनरी कंपनियों को घरेलू बाजार के मुकाबले विदेशों में उत्पाद बेचने से अधिक कमाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसी उद्देश्य से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और अन्य संबंधित शुल्कों में समय-समय पर बदलाव किया जाता है।

हर 15 दिन में होती है शुल्क की समीक्षा

केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और ATF पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी की हर पखवाड़े समीक्षा करती है। इसके लिए पिछले समीक्षा काल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की औसत कीमतों को आधार बनाया जाता है।

31 अक्टूबर 2026 को लागू किए गए नए बदलाव भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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