सोशल संवाद / डेस्क : मुंह का बार-बार सूखना या लार कम बनना सिर्फ प्यास लगने की वजह से नहीं होता। कई बार यह किसी दवा के साइड इफेक्ट, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को जेरोस्टोमिया (Xerostomia) कहा जाता है। लार की कमी से न सिर्फ बोलने और खाना निगलने में परेशानी होती है, बल्कि दांतों और मसूड़ों की सेहत भी प्रभावित हो सकती है।
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क्या है जेरोस्टोमिया?
जेरोस्टोमिया ऐसी स्थिति है, जिसमें मुंह की लार ग्रंथियां पर्याप्त मात्रा में लार नहीं बना पातीं या मुंह में लार की नमी कम हो जाती है। लार भोजन को चबाने और निगलने में मदद करती है। साथ ही यह मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को नियंत्रित रखने और दांतों को सड़न से बचाने में भी अहम भूमिका निभाती है।
इसलिए लंबे समय तक मुंह सूखने की समस्या को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।
मुंह सूखने के पीछे क्या हो सकते हैं कारण?
जेरोस्टोमिया होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- पानी की कमी: शरीर में पर्याप्त पानी न होने से लार का उत्पादन कम हो सकता है।
- दवाओं का असर: हाई ब्लड प्रेशर, एलर्जी, डिप्रेशन और अन्य बीमारियों की कुछ दवाओं से मुंह सूख सकता है।
- डायबिटीज: ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर भी मुंह सूखने की शिकायत हो सकती है।
- मुंह से सांस लेना: नाक बंद रहने या सोते समय मुंह से सांस लेने के कारण मुंह की नमी कम हो सकती है।
- तंबाकू और शराब: इनके सेवन से मुंह में सूखापन बढ़ सकता है।
- स्जोग्रेन सिंड्रोम: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें लार और आंसू बनाने वाली ग्रंथियां प्रभावित हो सकती हैं।
- कैंसर का इलाज: सिर और गर्दन के हिस्से में रेडिएशन या कीमोथेरेपी के कारण भी लार का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
जेरोस्टोमिया के लक्षणों को पहचानें
मुंह में सूखापन इस समस्या का सबसे सामान्य संकेत है। इसके अलावा कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:
- बार-बार प्यास लगना और मुंह में चिपचिपापन महसूस होना।
- जीभ और होंठों का सूखना या फटना।
- खाना चबाने और निगलने में परेशानी।
- बोलते समय मुंह सूखना।
- मुंह से दुर्गंध आना।
- स्वाद पहचानने में बदलाव महसूस होना।
- जीभ या मुंह में जलन और घाव होना।
- दांतों में सड़न और मुंह में संक्रमण का खतरा बढ़ना।
मुंह का सूखापन दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय
1. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। भोजन के दौरान भी पानी की छोटी-छोटी घूंट लेने से चबाने और निगलने में आसानी हो सकती है।
2. शुगर-फ्री च्यूइंग गम चबाएं
शुगर-फ्री च्यूइंग गम या बिना चीनी वाली कैंडी चूसने से लार बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है। जाइलिटोल युक्त उत्पाद दांतों की सुरक्षा में भी मदद कर सकते हैं।
3. कैफीन और शराब से दूरी रखें
चाय, कॉफी और शराब का अधिक सेवन कुछ लोगों में मुंह के सूखेपन को बढ़ा सकता है। तंबाकू और धूम्रपान से भी बचना चाहिए।
4. मुंह की साफ-सफाई का ध्यान रखें
दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करें और नियमित रूप से दांतों की जांच करवाएं। मुंह सूखने पर दांतों में सड़न और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
5. रात में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें
अगर सोते समय मुंह ज्यादा सूखता है, तो कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे हवा में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।
6. डॉक्टर की सलाह से इलाज कराएं
अगर किसी दवा के कारण मुंह सूख रहा है, तो डॉक्टर से उसके विकल्प या खुराक के बारे में बात करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आर्टिफिशियल सैलाइवा या लार बढ़ाने वाले उपचार की सलाह दे सकते हैं।
कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
अगर मुंह का सूखापन लगातार बना रहता है, पानी पीने के बाद भी राहत नहीं मिलती या इसके साथ आंखों में सूखापन, जोड़ों में दर्द, निगलने में परेशानी, मुंह में सफेद धब्बे अथवा बार-बार दांतों में सड़न जैसी समस्या होती है, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच करवानी चाहिए।
डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और चल रही दवाओं की जानकारी के आधार पर कारण का पता लगा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट या लार बनने की मात्रा की जांच भी की जा सकती है।
ध्यान दें: मुंह सूखने की समस्या का इलाज उसके वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें।











