सोशल संवाद / डेस्क : बिहार के बक्सर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां आठ महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए एक महिला सरकारी अधिकारी अपने ही कार्यालय के बाहर हाथ में कटोरा लेकर धरने पर बैठ गईं। ब्रह्मपुर प्रखंड कार्यालय में तैनात ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) अल्पिता सिंह के इस विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है और संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से स्पष्टीकरण मांगा है।
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11 महीने की नौकरी में सिर्फ 3 महीने का मिला वेतन
अल्पिता सिंह का आरोप है कि वह पिछले 11 महीनों से ब्रह्मपुर प्रखंड में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें केवल तीन महीने का ही वेतन मिला है। पिछले आठ महीनों से वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि लगातार काम करने के बावजूद वेतन नहीं मिलने से उनकी स्थिति मुश्किल हो गई है। इसी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने विरोध का यह तरीका अपनाया।
दो दिनों तक कटोरा लेकर कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन
वेतन भुगतान में देरी के विरोध में अल्पिता सिंह लगातार दो दिनों तक ब्रह्मपुर प्रखंड कार्यालय के बाहर कटोरा लेकर बैठीं। उनका यह प्रदर्शन सांकेतिक था, जिसके जरिए उन्होंने वेतन नहीं मिलने से पैदा हुई आर्थिक परेशानी को सामने रखा।
प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लिया।
जिला प्रशासन ने BDO से मांगा स्पष्टीकरण
अल्पिता सिंह के विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें वायरल होने के बाद बक्सर जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया। जिलाधिकारी ने ब्रह्मपुर के BDO सोनू कुमार से स्पष्टीकरण मांगा है। उनसे पूछा गया है कि महिला अधिकारी के वेतन भुगतान में देरी किन परिस्थितियों में हुई।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी का वेतन निर्धारित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं रोका जा सकता। मामले में प्रशासनिक जांच और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
BDO ने आरोपों को बताया गलत, उपस्थिति पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, ब्रह्मपुर के BDO सोनू कुमार ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि ग्रामीण विकास पदाधिकारी का वेतन रोकने का अधिकार उनके पास नहीं है। वह केवल कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति का विवरण कोषागार को भेजते हैं, जिसके आधार पर वेतन का भुगतान किया जाता है।
BDO के मुताबिक, अल्पिता सिंह की ओर से कई महीनों तक बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं बनाने और लगातार अनुपस्थित रहने से संबंधित रिपोर्ट भी जिला प्रशासन को भेजी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि दो महीने के अर्जित अवकाश की स्वीकृति नहीं मिली थी।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से वेतन भुगतान, बायोमेट्रिक उपस्थिति और दोनों अधिकारियों के बीच विवाद की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











