सोशल संवाद / नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम के नेता सदन जयभगवान यादव ने आज निगम सदन की बैठक के दौरान हुई घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सदन की गरिमा, अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष श्री अंकुश नारंग तथा अन्य आप पार्षदों ने निगम सदन में प्रवेश के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा कथित रूप से हाथापाई और धक्का-मुक्की की।
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जयभगवान यादव ने कहा कि आज दिल्ली नगर निगम की साधारण सभा की बैठक सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से चल रही थी। बैठक में पार्षदों द्वारा दिल्ली के नागरिकों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों, विशेषकर प्रदूषण, अवैध निर्माण तथा अन्य गंभीर जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की जा रही थी। विभिन्न पार्षद अपने-अपने सुझाव सदन के समक्ष रख रहे थे और जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श हो रहा था।
उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सदन की कार्यवाही में सकारात्मक एवं रचनात्मक रूप से भाग लें। लेकिन आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने बैठक की शुरुआत में चर्चा में हिस्सा नहीं लिया और लगभग दो घंटे की देरी से सदन में पहुंचे।
नेता सदन ने आरोप लगाया कि जब आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष अंकुश नारंग सदन में प्रवेश करने पहुंचे, तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें निर्धारित एवं उपयुक्त प्रवेश द्वार से सदन में जाने के लिए कहा। इस दौरान श्री नारंग और उनके साथ मौजूद कुछ पार्षदों ने सुरक्षा कर्मियों के साथ बहस की और कथित रूप से उनके साथ धक्का-मुक्की एवं बदसलूकी की।
जयभगवान यादव ने कहा कि सुरक्षा कर्मी सदन की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। निर्धारित प्रवेश द्वार और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करवाना उनकी जिम्मेदारी है। किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि से यह अपेक्षा की जाती है कि वह सुरक्षा कर्मियों के साथ सहयोग करे और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करे।
उन्होंने कहा, “सुरक्षा व्यवस्था किसी एक दल या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे निगम सदन की सुरक्षा के लिए होती है। सुरक्षा कर्मियों को अपना कर्तव्य निभाने से रोकना, उनके साथ धक्का-मुक्की करना या अभद्र व्यवहार करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।”
नेता सदन ने कहा कि निगम सदन दिल्ली के करोड़ों नागरिकों का प्रतिनिधि मंच है। यहां होने वाली प्रत्येक चर्चा और निर्णय का सीधा संबंध दिल्ली की जनता के जीवन से है। इसलिए राजनीतिक मतभेदों को सदन की मर्यादा और अनुशासन के ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण, अवैध निर्माण, स्वच्छता, स्वास्थ्य, नागरिक सुविधाओं और दिल्लीवासियों से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन की बैठक बुलाई जाती है। ऐसे में सदन की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय विपक्ष को रचनात्मक चर्चा में भाग लेना चाहिए और अपने सुझाव देने चाहिए।
श्री यादव ने कहा, “विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और लोकतंत्र में असहमति भी महत्वपूर्ण है, लेकिन अपनी बात रखने का माध्यम सदन की नियमावली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया होनी चाहिए। सुरक्षा कर्मियों के साथ कथित हाथापाई या बदसलूकी किसी भी परिस्थिति में लोकतांत्रिक विरोध का उचित तरीका नहीं हो सकता।”











