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अभय ने पेपरलीक से वसूली तक के लिए बनाया ‘कॉरपोरेट सिंडिकेट’

By Riya Kumari

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अभय ने पेपरलीक से वसूली तक के लिए बनाया 'कॉरपोरेट सिंडिकेट'
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सोकीय; संवाद / रांची : जेपीएससी व जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितता के मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने कॉरपोरेट स्टाइल में पेपरलीक से लेकर वसूली व ब्लैकमेलिंग तक का अलग-अलग सिंडिकेट तैयार किया था। सीआईडी की अलग-अलग एसआईटी जेपीएससी व जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में अनियमितता की जांच कर रही हैं।

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जांच में यह बात सामने आई है कि 14वीं जेपीएसससी समेत अन्य परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों ने सेटिंग करायी थी, उन सभी के पैसे नहीं मिलने पर ब्लैकमेल करने तैयारी भी अभय ने की थी। इसके लिए अभय के द्वारा 24 सफल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, ए4 साइज के ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर व चेकबुक उसके द्वारा रख लिए गए थे। अगर किसी परीक्षार्थी के द्वारा चयन के बाद भी पैसे नहीं दिए जाते तो वह परीक्षार्थियों को अलग-अलग तरीके से ब्लैकमेल करता।

सीआईडी की जांच में यह बात सामने आयी है कि अभय तिवारी ने गिरोह के पास दस्तावेज जुलाई माह तक थे। इस दौरान जब जेपीएससी परीक्षाओं में अनियमितता की चर्चा होनी लगी, तब तब सारे अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट उमेश कुमार ने अपने पास रखे थे। अभय तिवारी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में यह बताया गया है कि उसने 11 अभ्यर्थियों से उगाही का पैसा भाई अक्षय के जरिए उसके साले सौरभपांडेय तक पहुंचाए थे।

वहीं अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को उपलब्ध करायी गई थी। वहीं, उमेश ने बताया है कि जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता में जब सारे खुलासे होने लगे, तब वह बनारस चला गया था। बनारस से लौटने के बाद उसने रांची के बाहर अभ्यर्थियों को दस्तावेज सौंप दिए थे। जांच में यह बात भी सामने आयी है कि अभय तिवारी के साथ मिलकर उमेश कुमार ने कई अन्य परीक्षाओं में भी वसूली की थी।

जानिए कैसे कॉरपोरेट स्टाइल में करता था काम

अभय तिवारी ने टीडीपीएल की इंट्री झारखंड में करायी थी। इसके लिए साले सौरभ पांडेय के नाम पर ही लालपुर स्थित फ्लैट का लीज एग्रीमेंट कराया गया। परीक्षा में ओएमआर समेत अन्य छेड़छाड़ की जा सके, इसके लिए उसने टीडीपीएल व लखनऊ की कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी के बीच एग्रीमेट भी कराया था। केस में गिरफ्तार हो चुके मो उस्मान व मो एबाद पिकर के लिए ही काम करते थे। कंपनी के निदेशक हेमंत शर्मा को कंपनी का खर्च उठाने के अलावे 20 प्रतिशत कमीशन का झांसा भी दिया गया था।

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