सोशल संवाद / रांची : झारखंड में जल्द ही अंतरराज्यीय खनिज परिवहन पर नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इस व्यवस्था का नाम इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) होगा। खान एवं भूतत्व विभाग इसको लेकर एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसपर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति ली जाएगी। इस नियम के तहत किसी भी दूसरे राज्य से झारखंड में प्रवेश करने वाले लघु खनिज (बालू, गिट्टी, बोल्डर) लाने वाले वाहनों से राज्य सरकार टैक्स वसूलेगी।
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नए नियम लागू होने के बाद खनिज लदे वाहनों को झारखंड की सीमा में प्रवेश से पहले आईएसटीपी पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ट्रांजिट पास लेना होगा। वाहन स्वामियों को पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद एक यूनिक लॉग-इन आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। किसी अन्य राज्य की माइनिंग साइट से खनिज का चालान कटने के छह घंटे के भीतर आईएसटीपी पास जेनरेट करना होगा। यदि यह समय-सीमा बीत जाती है या वाहन बिना पास के पाया जाता है, तो उसे सीधे अवैध परिवहन माना जाएगा और तत्काल जब्त कर लिया जाएगा।
बिहार ने 10 जून से लागू किया है आईएसटीपी: बिहार सरकार ने 10 जून से एक नया नियम प्रभावी कर दिया है। बालू, पत्थर जैसे लघु खनिज लेकर बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट पास शुल्क अनिवार्य किया गया है। इसके तहत वहां लघु खनिज लदे वाहनों से 60 रुपए प्रति मीट्रिक टन अथवा 85 रुपए प्रति घनमीटर (जो भी लागू हो) की दर से शुल्क वसूला जाएगा। बिहार के इसी मॉडल को देखते हुए झारखंड सरकार ने समान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि खासकर पड़ोसी राज्यों से होने वाले खनिज परिवहन पर बेहतर नियंत्रण हो सके।
राजस्व संग्रह और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लक्ष्य
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, वर्तमान में दूसरे राज्यों से झारखंड में आने वाले खनिजों की मात्रा और प्रकार पर नजर रखने की कोई प्रभावी प्रणाली नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए नई व्यवस्था लाने का प्रस्ताव है। नए नियम से राज्य के राजस्व में वृद्धि तो होगी ही, अवैध परिवहन और एक ही चालान पर बार-बार खनिज ढुलाई की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी। इंटर स्टेट ट्रांजिट पास के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। शुल्क नहीं चुकाने वाले वाहनों को सीमा पर ही रोक दिया जाएगा।










