सोशल संवाद /रांची : जेपीएससी की सीडीपीओ भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। अभय तिवारी ने सीआईडी को दिए बयान में स्वीकारा है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ख्यांगते और सदस्य अजीता भट्टाचार्य की मिलीभगत से झारखंड से बाहर के अभ्यर्थियों के हाथों सामान्य वर्ग की सीटें 15 लाख तक में बेची गईं।
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अभय ने स्वीकारा कि सीडीपीओ परीक्षा में सामान्य वर्ग की लगभग सभी सीटें बेच दी गईं। सीटें टीडीपीएल कंपनी के जरिए अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई गई थीं, जहां प्रति अभ्यर्थी सेटिंग का रेट 10 लाख तय थे। टीडीपीएल के जरिए सेटिंग पहला नाम रजक का है। उसका इंटरव्यू बोर्ड तत्कालीन अध्यक्ष ख्यांगते का था। इसमें रामवीर सिंह के जरिए बात हुई और 15 लाख लिए गए। दूसरा नाम काजल भारती का है, जिनका इंटरव्यू बोर्ड सदस्य अजीता भट्टाचार्य के पास था। उनके पीए को 10 लाख दिए गए थे। अभय के अनुसार, आईटी प्रोजेक्ट मैनेजर कृष्णा के जरिए प्रमोद पाठक और डॉली जायसवाल की सेटिंग कराई गई थी। इसमें सदस्य अजीता भट्टाचार्य मुख्य माध्यम थीं। अब अभय के बयान के आधार पर सीआईडी ने साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
गिरिडीह में अभय के ससुर से भी सीआईडी की पूछताछ
बेंगाबाद (गिरिडीह)। जेपीएससी-जेएसएससी में गड़बड़ी मामले में सीआईडी की टीम मंगलवार को फिर बेंगाबाद के हाथबोर गांव पहुंची। वहां अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय से करीब एक घंटे पूछताछ की। टीम ने अभय और उसके संपर्क वाले लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। इधर, रांची में अभय के बयान पर सीआईडी टीम बेवेल कंपनी के कोलकाता दफ्तर के लोगों से पूछताछ कर सकती है।









