सोशल संवाद / डेस्क : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि NEET-UG परीक्षा को समाप्त किया जाए और मेडिकल कॉलेजों में दाखिला छात्रों के 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर दिया जाए। पार्टी का कहना है कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली लाखों छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा रही है और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के साथ बराबरी का अवसर नहीं दे पा रही है
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DMK ने क्यों उठाई यह मांग?
DMK का कहना है कि एक ही प्रवेश परीक्षा के आधार पर मेडिकल सीटों का फैसला करना उचित नहीं है। पार्टी का मानना है कि छात्रों की पूरे साल की मेहनत और 12वीं बोर्ड में प्रदर्शन को अधिक महत्व मिलना चाहिए। DMK नेताओं का दावा है कि NEET की वजह से कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता लगातार बढ़ी है, जिससे आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों को फायदा मिलता है, जबकि सरकारी स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों के कई मेधावी छात्र पीछे छूट जाते हैं।
NEET विवाद के बीच फिर चर्चा में आया मुद्दा
हाल के वर्षों में NEET परीक्षा को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बाद विपक्षी दल लगातार परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इसी बीच DMK ने एक बार फिर अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा है कि मेडिकल एडमिशन का आधार 12वीं के बोर्ड परीक्षा के अंक होने चाहिए।
तमिलनाडु पहले भी करता रहा है विरोध
NEET का सबसे ज्यादा विरोध तमिलनाडु में देखने को मिला है। राज्य सरकार और DMK लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि यह परीक्षा राज्य के छात्रों, खासकर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के हित में नहीं है। इसी कारण तमिलनाडु विधानसभा कई बार NEET से राज्य को छूट देने का प्रस्ताव भी पारित कर चुकी है।
फिलहाल क्या है नियम?
वर्तमान में देशभर के MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्सों में प्रवेश केवल NE NEET पास करना अनिवार्य है। इसलिए जब तक केंद्र सरकार कानून या नियमों में बदलाव नहीं करती, तब तक मेडिकल एडमिशन की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा।
क्या बदल सकता है सिस्टम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेडिकल एडमिशन को केवल 12वीं के अंकों से जोड़ना है, तो इसके लिए केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर कानून और मेडिकल प्रवेश नियमों में संशोधन करना होगा। इसके अलावा अलग-अलग शिक्षा बोर्डों के मूल्यांकन में अंतर होने के कारण एक समान प्रवेश प्रणाली बनाना भी बड़ी चुनौती होगी।
छात्रों के बीच छिड़ी नई बहस
DMK की इस मांग के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ छात्र मानते हैं कि 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिला मिलने से परीक्षा का दबाव कम होगा, जबकि कई छात्रों का कहना है कि NEET पूरे देश के लिए एक समान और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराता है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में शिक्षा और राजनीति, दोनों के केंद्र में बना रह सकता है।









