सोशल संवाद / जमशेदपुर : वेदांता लिमिटेड ने केबल कंपनी (इनकैब) का कब्जा लेने के बाद रविवार को प्लांट की साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया। गोलमुरी स्थित प्लांट में जेसीबी की मदद से सफाई शुरू की गई। इस मौके पर कंपनी के अधिकारी मौजूद थे।
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दूसरी ओर, कंपनी की ओर से केबुल कंपनी के सभी बंगला और क्वार्टरों में रविवार को ही नोटिस चिपकाया गया है। उसमें बताया गया कि यह संपत्ति वेदांता लिमिटेड की है, जिसे उसने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) कोलकाता के 3 दिसंबर 2025 के फैसले के आलोक में मे हासिल किया है। अगर इस पर किसी को आपत्ति है तो वह वेदांता प्रबंधन से बात कर सकता है।
इस आदेश में कहा गया था कि इस प्रॉपर्टी के संबंध में किसी भी तरह का बिना इजाजत कब्जा, अतिक्रमण, घुसपैठ, सफाई, लेन-देन या किसी भी तरह की अनधिकृत गतिविधि पूरी तरह से अवैध है। बताया जाता है कि कंपनी के 165 क्वार्टर व बंगला और केबुल बस्ती में 20 गुना 20 के 156 प्लॉट हैं। इन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। इनमें से कुछ कंपनी के पूर्व कर्मचारी हैं जबकि कुछ अवैध कब्जाधारक। दूसरी ओर, इंडियन केबल वर्कर्स यूनियन के महामंत्री राम विनोद सिंह ने कर्मचारियों से अपील की है कि 26 साल के बाद कंपनी एक बार फिर खुलने की संभावना बढ़ी है। सभी को इसमें मदद करनी चाहिए।
समिति की बैठक में बंद अवधि का पूरा वेतन लेने पर चर्चा
केबुल संघर्ष समिति की बैठक रविवार शाम केबुल वेलफेयर क्लब में हुई, जिसमें इकैब के पुणे व कोलकाता ब्रांच में कार्यरत कर्मचारियों को बंद अवधि का पूरा वेतन मिला है। ऐसे में जमशेदपुर प्लांट के कर्मचारियों को भी इसका लाभमिले, इस पर कर्मचारियों ने चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. बीबी महतो ने कहा कि इस मामले को लेकर उनकी ओर से पहले से एनसीएलटी की कोलकाता बैच में केस विचाराधीन है और अगली सुनवाई आठ जुलाई को है। कोर्ट ने पुणे व कोलकाता ब्रांच के कर्मचारियों को वेतन का लाभ दिया है।









