सोशल संवाद / नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आउट सोर्स लैब टेस्ट में सामने आ रहे करोड़ों रुपए के घोटाले पर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि दवा के बाद अब रेखा गुप्ता सरकार का आउटसोर्स लैब टेस्ट घोटाला सामने आया है। 650 करोड़ के दवा घोटाले से सरकार दबाव में है। इसलिए आनन-फानन में आरोग्य मंदिरों, डिस्पेंसरियों और सरकारी अस्पतालों में आउट सोर्स लैब टेस्ट बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल हुए टेंडर की शर्तों पर शुरू से सवाल उठ रहे थे। अब सरकार कंपनी को टेंडर का एक्सटेंशन देने में घबरा रही है। इस टेंडर को रोकने से पहले ही सरकार दूसरी कंपनी को जिम्मेदारी दे देती, तो जरूरी टेस्ट होते रहते।

शुक्रवार को “आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर कहा कि करोड़ों रुपए का एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। 350 आरोग्य मंदिरों, 200 डिस्पेंसरियों और 28 सरकारी अस्पतालों में होने वाले सभी आउटसोर्स लैब टेस्ट अचानक रोक दिए गए हैं। डॉक्टरों द्वारा इस टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने के कारण इन सेवाओं को रोका गया है। रेखा गुप्ता की सरकार पिछले एक साल से इन आरोपों को नजरअंदाज कर रही थी, लेकिन अब घोटाले की परतें खुलने के बाद सरकार बुरी तरह घबरा गई है। इसी वजह से प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने एक ईमेल भेजकर सभी को यह जानकारी दी है कि लैब की सभी सेवाएं रोक दी गई हैं।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि एक वक्त था, जब आउटसोर्स लैब पर भाजपा झूठे आरोप लगाती थी तो टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे अखबार आधे-आधे पेज की खबर छापते थे। आज 650 करोड़ के स्कैम पर हिंदी के अखबार रोज खबरें कर रहे हैं, लेकिन अंग्रेजी के अखबार खासतौर पर टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स बिल्कुल चुप बैठे हैं। अगर लोग अपनी खबरों के लिए इन अंग्रेजी अखबारों पर निर्भर हैं, तो उन्हें ऐसी बहुत सारी खबरें नहीं मिलेंगी।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली सरकार का एक फरमान आया है, जिसके तहत 28 सरकारी अस्पतालों, करीब 350 आरोग्य मंदिरों और 200 डिस्पेंसरियों की आउटसोर्स लेबोरेटरी सर्विस अचानक बंद कर दी गई है। इसके कारण ब्लड, शुगर, यूरिन और स्टूल जैसे सभी जरूरी टेस्ट बंद हो गए हैं। दिल्ली सरकार के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने ईमेल के जरिए बताया है कि इस टेंडर को लेकर भी बड़े स्तर पर आरोप लगाए जा रहे थे।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह टेंडर पिछले साल 2025 में रेखा गुप्ता सरकार ने हिंदुस्तान वेलनेस नाम की एक प्राइवेट कंपनी को दिया था। ईमेल के अनुसार जिला स्तर के डॉक्टर लगातार इस टेंडर की शर्तों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रहे थे। अब एक साल बाद जब टेंडर को एक्सटेंशन देने का वक्त आया, तो घबराहट में इसे एक्सटेंशन नहीं दिया गया और सारी सुविधाएं बंद कर दी गईं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर सरकार ने पहले ही तय कर लिया था कि टेंडर एक्सटेंड नहीं करना है, तो दो-ढाई महीने पहले नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए थी। कोई दूसरी कंपनी लाए बिना अचानक इस टेंडर को बंद कर दिया गया। इसका सीधा मतलब है कि 650 करोड़ के स्कैम के आरोपों से सरकार घबराहट और दबाव में है। यह मामला भी एक नया स्कैम बनकर निकल सकता है जिसमें आउटसोर्स लैब के टेंडर की खामियों पर डॉक्टर लगातार सवाल उठा रहे थे।










