सोशल संवाद / डेस्क : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के पीस बॉन्ड नोटिस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बावजूद उन्होंने कहा है कि वह इस नोटिस को आगे भी चुनौती देंगी। 16 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तो इसे शांति भंग करने की आशंका से कैसे जोड़ा जा सकता है? नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि पीस बॉन्ड की शर्तों के जरिए प्रदर्शन करने और सरकार से सवाल पूछने के अधिकार को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
यह भी पढ़े : PM Modi Varanasi Visit 2026: 25 अक्टूबर को काशी आएंगे पीएम मोदी, नमो घाट पर होगा एयर शो
पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करेंगी नेहा बोरा
नेहा बोरा के मुताबिक, न तो वह और न ही उनका छात्र संगठन दिल्ली पुलिस की ओर से मांगे गए पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करेगा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद भी वह इस नोटिस को कानूनी रूप से चुनौती देने का प्रयास जारी रखेंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष होने वाली कार्यवाही में पेश होंगी और अपना पक्ष रखेंगी। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, लेकिन दिया अहम निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के नोटिस को चुनौती देने वाली नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने इस स्तर पर रिट याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।
हालांकि, अदालत ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि कार्यवाही में जिन दस्तावेजों और सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें नेहा बोरा को उपलब्ध कराया जाए।
नेहा बोरा ने अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए इस्तेमाल की जा रही सामग्री उन्हें दिखाई जानी चाहिए। उनके अनुसार, इससे उन्हें अपना पक्ष रखने और कार्यवाही का विरोध करने का उचित अवसर मिलेगा।
16 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर उठाए सवाल
नेहा बोरा ने 16 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और इसे शांति भंग करने की आशंका से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं पर पुलिस की ओर से किया गया लाठीचार्ज जिम्मेदार था। यह नेहा बोरा का आरोप है; घटना के संबंध में सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
उन्होंने प्रदर्शन स्थल को लेकर भी पुलिस के दावे पर सवाल उठाया। नेहा बोरा के मुताबिक, आयोजकों ने लोगों से कनॉट प्लेस के बजाय मंडी हाउस में जुटने की अपील की थी।
अब SEM के सामने होगी आगे की कार्यवाही
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। नेहा बोरा का कहना है कि वह वहां पेश होकर अपना पक्ष रखेंगी और पीस बॉन्ड नोटिस का विरोध करेंगी।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है, जबकि संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया में यह स्पष्ट होगा कि नोटिस और पीस बॉन्ड को लेकर उनकी आपत्तियों पर क्या रुख सामने आता है।










