सोशल संवाद / चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के तांतनगर क्षेत्र स्थित कोकचो ओपी में बालू लदे ट्रैक्टरों से कथित रूप से ₹5,000 प्रति ट्रैक्टर प्रति माह एंट्री लिए जाने का आरोप लगाया गया है। एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि गोप ने इस मामले को लेकर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त से उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर एंट्री देने वाले बालू लदे वाहनों के प्रति नरमी बरती जाती है, जबकि एंट्री नहीं देने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
40 से 50 ट्रैक्टरों की आवाजाही का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार तांतनगर, इलीगढ़ा, डोबरा बसा, सासे और आसपास के नदी क्षेत्रों से बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही होती है। दावा किया गया है कि प्रतिदिन करीब 40 से 50 ट्रैक्टर चाईबासा और झींकपानी की ओर जाते हैं।
रामहरि गोप का कहना है कि यदि कथित एंट्री वसूली और कार्रवाई में भेदभाव की शिकायत जांच में सही पाई जाती है, तो मामला सरकारी राजस्व, कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही से भी जुड़ सकता है।
CCTV और सरकारी रिकॉर्ड मिलाने की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच के लिए CCTV फुटेज, GD/सनहा, वाहन जांच एवं जब्ती रजिस्टर, चालान, खनन विभाग के रिकॉर्ड और संबंधित वाहनों की आवाजाही का तुलनात्मक मिलान कराने की मांग की है।
उन्होंने कोकचो ओपी प्रभारी सहित संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि अवैध वसूली, पक्षपात या पद के दुरुपयोग के आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
बालू परिवहन को लेकर पहले भी कार्रवाई
पश्चिमी सिंहभूम में अवैध बालू परिवहन के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के मामले सामने आते रहे हैं। सितंबर 2026 में सोनुआ थाना क्षेत्र में पुलिस ने बालू लदी ट्रैक्टर की ट्रॉली जब्त की थी। वहीं सरकारी पुलिस रिकॉर्ड में तांतनगर ओपी क्षेत्र से जुड़े बालू परिवहन के एक पुराने मामले में ट्रैक्टर जब्ती का भी उल्लेख है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
रामहरि गोप ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोष साबित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल ₹5,000 मासिक एंट्री वसूली के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में CCTV, पुलिस रिकॉर्ड और खनन विभाग के दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।












