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पर्यटन विकास की आड़ में वन दोहन का आरोप, ग्राम सभाओं की अनदेखी पर नाराज़गी

By Riya Kumari

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : कोल्हान क्षेत्र दलमा अभ्यारण्य परिसर में प्रस्तावित 200 फीट लंबे ग्लास ब्रिज,रोपवे तथा अन्य पर्यटन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभाओं में नाराज़गी गहराती जा रही है। दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच,कोल्हान ने इन परियोजनाओं का तीखा विरोध जताते हुए कहा है कि पर्यटन विकास के नाम पर वन दोहन किया जा रहा है और ग्राम सभा की सहमति के बिना कार्य शुरू का आदेश दिए हैं, जो कानूनन गलत है।

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मंच के सचिव दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि दलमा अभ्यारण्य को विश्व स्तरीय और “टूरिस्ट-फ्रेंडली” बनाने की पहल में वन विभाग स्थानीय समुदायों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देने की आड़ में जंगलों की कटाई, पर्यावरणीय संरचनाओं को नुकसान और वनाधिकार कानून की अवहेलना कर रहा है।

ग्राम सभा को दरकिनार कर काम शुरू होने का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने न तो किसी ग्राम सभा से लिखित सहमति ली और न ही परियोजना से जुड़े प्रभावों पर बातचीत की। ग्रामीणों के अनुसार, अभ्यारण्य क्षेत्र आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर, जीविका और परंपरागत अधिकारों से जुड़ा है। ऐसे में बिना सहमति किसी भी तरह का निर्माणकार्य उनके अधिकारों का हनन है।

पर्यटन परियोजनाओं पर उठ रहे सवाल

प्रस्तावित ग्लास ब्रिज और रोपवे परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों ने भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि हज़ारों पर्यटकों की आवाजाही से वन्यजीव संरक्षण प्रभावित होगा और हाथियों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न होगा।

मंच के सचिव दलमा टाइगर सुकलाल पहाडिया ने बताया कि भारी मशीनरी के उपयोग से पहाड़ी इलाके की संरचना प्रभावित भी होगी ।

पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है,और निर्माण क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियाँ घटने लगी हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार लिखित आपत्ति देने के बावजूद विभाग कोई जवाब नहीं दे रहा है।

वन विभाग के रवैये पर सवाल?

दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि कभी इको टूरिज्म के नाम पर तो कभी पर्यटन डेवलपमेंट के नाम पर (नेचुरेल चेंजग कर दोहन पर तुला हुआ है) विकास कार्यों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना वन विभाग की जिम्मेदारी है, परंतु विभाग “ऊपर से आदेश” के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा सर्वोच्च इकाई है और उसके निर्णय की अनदेखी कानूनी रूप से भी अनुचित है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

मंच ने चेतावनी दी है कि यदि परियोजनाओं को तुरंत रोका नहीं गया और ग्राम सभाओं के साथ औपचारिक वार्ता नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

ग्रामीण जल्द ही सामूहिक धरना, जन-जागरूकता अभियान और बड़े पैमाने पर रैली निकालने की तैयारी में हैं।

स्थाई विकास बनाम पर्यटन दबाव

स्थानीय समुदायों का कहना है कि यदि पर्यटन विकास जरूरी है तो पहले पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA), सामाजिक सर्वे और ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।

उनका कहना है कि “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी जमीन, जंगल और जीवन शैली की कीमत पर नहीं।”

दलमा अभ्यारण्य में पर्यटन परियोजनाओं को लेकर यह विवाद अब बड़ा रूप लेता दिख रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रशासन और ग्रामीणों के बीच एक प्रमुख टकराव का कारण बन सकता है।

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