सोशल संवाद / डेस्क : मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इस समझौते की जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से दी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने बताया कि कई दौर की बातचीत और राजनयिक प्रयासों के बाद दोनों देशों ने सैन्य गतिविधियों को रोकने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।
ट्रंप ने की समझौते की पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए सकारात्मक कदम साबित होगा। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे कूटनीति की जीत बताया।
यूरोपीय देशों ने किया स्वागत
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर इस समझौते का स्वागत किया है। यूरोपीय देशों ने कहा कि वे अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस अवसर का उपयोग स्थायी शांति और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए करेंगे।
यूरोपीय नेताओं ने पाकिस्तान, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों की भूमिका की भी सराहना की है, जिन्होंने दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रखने में अहम योगदान दिया।
होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की तैयारी
समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी सकारात्मक असर देखने को मिला है। एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की संभावना मानी जा रही है। होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आने की उम्मीद है।
जी7 बैठक में होगी आगे की चर्चा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते और होर्मुज़ स्ट्रेट को दीर्घकालिक रूप से खुला रखने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे न केवल मध्य पूर्व में तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।









