सोशल संवाद/डेस्क: देश में 8th Pay Commission को लेकर चर्चाएं तेज हैं और इसी के साथ पेंशन व्यवस्था को लेकर भी बहस फिर से जोर पकड़ रही है। इस बीच केंद्र सरकार ने संसद में अपना रुख साफ कर दिया है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम यानी ओपीएस को दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।
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सरकार ने बताया कि फिलहाल केंद्रीय कर्मचारी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) के दायरे में ही रहेंगे। हालांकि कुछ राज्यों ने अपने कर्मचारियों के लिए ओपीएस लागू किया है, लेकिन केंद्र सरकार स्तर पर ऐसा कोई कदम उठाने की योजना नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पेंशन पर बढ़ता वित्तीय बोझ ही सरकार के इस रुख की बड़ी वजह है, जिसका असर भविष्य में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर भी पड़ सकता है।
सरकार ने यह भी साफ किया कि जिन राज्यों ने ओपीएस अपनाया है, उन्हें एनपीएस के तहत जमा केंद्र और कर्मचारी अंशदान की वापसी का कोई प्रावधान नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि ओपीएस की राह कानूनी और वित्तीय दोनों ही दृष्टि से जटिल बनी हुई है।
वहीं केंद्र सरकार यूनिफाइड पेंशन स्कीम को एक संतुलित विकल्प के रूप में आगे बढ़ा रही है। यूपीएस के तहत 25 साल की सेवा पूरी करने पर रिटायरमेंट से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलने का प्रावधान है। साथ ही न्यूनतम 10 साल की सेवा पर 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की व्यवस्था भी शामिल है।
पेंशन को लेकर सरकार के इस स्पष्ट रुख से यह संकेत मिलता है कि 8वें वेतन आयोग में वेतन और भत्तों पर तो चर्चा संभव है, लेकिन ओपीएस की वापसी की उम्मीद फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।










