सोशल संवाद / जमशेदपुर : तेलुगु संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के रंगों से कदमा का बाल गणपति विलास रविवार, 1 नवंबर को सराबोर नजर आया। झारखंड राज्य तेलुगु कम्युनिटी वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से यहां आंध्र प्रदेश स्थापना दिवस (आंध्र प्रदेश अवतरण दिनोत्सवाम) धूमधाम और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में तेलुगु समाज के लोग शामिल हुए और अपनी भाषा, संस्कृति तथा परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लिया।
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समारोह में एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि अपनी मातृभूमि से दूर झारखंड में रहने वाले तेलुगु भाषी परिवारों को एक मंच पर लाना और उनके बीच भाईचारे की भावना मजबूत करना संस्था का प्रमुख उद्देश्य है।
छह साल में पांच जिलों तक पहुंचा संगठन
एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष ईटी. धर्माराव ने संगठन की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था के गठन के महज छह वर्षों में झारखंड के पांच जिलों के तेलुगु समाज के लोगों ने इसकी स्थायी सदस्यता ग्रहण की है। उन्होंने कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिले यानी जमशेदपुर से स्थायी सदस्यों की संख्या सबसे अधिक है। इसे उन्होंने पूरे स्थानीय तेलुगु समाज के लिए गर्व की बात बताया।
समाजसेवियों और प्रतिभाओं को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान समाज के विकास, उत्थान और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। एसोसिएशन की ओर से उन्हें पारंपरिक कंडुवा (सम्मानित वस्त्र) और गुलदस्ता भेंट कर सम्मान दिया गया।
संस्था के महासचिव पी. सीताराम राजू ने कहा कि तेलुगु भाषा का विकास, सामाजिक समरसता, समानता और जरूरत के समय समाज के लोगों की सहायता करना संस्था के प्रमुख उद्देश्य हैं। इसके साथ ही तेलुगु संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित करना भी संगठन की प्राथमिकता है।
अमरजीवी पोट्टि श्रीरामुलु को दी श्रद्धांजलि
समारोह में अलग तेलुगु राज्य के गठन के लिए 58 दिनों तक आमरण अनशन करने वाले अमरजीवी पोट्टि श्रीरामुलु के बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने और झारखंड में तेलुगु भाषा, साहित्य एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए समाज के लोग
इस अवसर पर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. जयराम दास, एस. साई प्रसाद, बी. सुधाकर, कोषाध्यक्ष बी. हरीश, समिति सदस्य जी.वी. मल्लेश, के. श्रीनिवास राव, जी.के. गोपाल कृष्ण, पी. अलैख्या और पद्मजा सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी रही। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया।











