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Android vs iOS: iOS 26 के बाद भी ये 3 फीचर्स iPhone में नहीं, Android यूजर्स को मिलता है फायदा

By Riya Kumari

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सोशल संवाद / डेस्क : टेक दुनिया में Android और iOS की राइवलरी कई सालों से जारी है। दोनों प्लेटफॉर्म समय-समय पर एक-दूसरे से फीचर्स अपनाते रहे हैं, जिससे इनके बीच का अंतर काफी कम हो गया है।

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हाल ही में Apple ने iOS 26 में स्क्रीन कस्टमाइजेशन जैसे नए फीचर्स जोड़े हैं, वहीं Google ने Android में प्राइवेसी कंट्रोल को और मजबूत किया है। बावजूद इसके, अब भी कुछ ऐसे फीचर्स हैं जो Android में मौजूद हैं, लेकिन iPhone यूजर्स को नहीं मिलते।

स्प्लिट स्क्रीन मल्टीटास्किंग (Split Screen Multitasking)

Android यूजर्स को 2016 में आए Android 7.0 अपडेट के बाद से ही स्प्लिट स्क्रीन फीचर मिल रहा है। इस फीचर की मदद से आप एक ही समय में दो अलग-अलग ऐप्स चला सकते हैं—जैसे YouTube देखते हुए चैट करना या नोट्स बनाते हुए ब्राउज़िंग करना।

हालांकि Apple ने iPad में यह सुविधा पहले से दी हुई है, लेकिन iPhone में अब तक यह फीचर उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि मल्टीटास्किंग के मामले में Android को बढ़त मिलती है।

मल्टीपल यूजर और गेस्ट मोड

Android में 2014 से मल्टीपल यूजर प्रोफाइल और गेस्ट मोड की सुविधा मौजूद है। इसका मतलब है कि एक ही डिवाइस पर अलग-अलग यूजर अपने ऐप्स, डेटा, पासवर्ड और सेटिंग्स के साथ अलग प्रोफाइल बना सकते हैं।

गेस्ट मोड का फायदा यह है कि काम खत्म होते ही सारा डेटा ऑटोमैटिक क्लीन हो जाता है।

iPhone में ‘Guided Access’ का विकल्प जरूर मिलता है, लेकिन यह Android के मल्टी-यूजर सिस्टम जितना फ्लेक्सिबल और सुविधाजनक नहीं है।

ऐप डाउनलोड करने की ज्यादा फ्रीडम (Sideloading)

Android यूजर्स को ऐप डाउनलोड करने की अधिक स्वतंत्रता मिलती है। आप Google Play Store के अलावा सीधे डेवलपर की वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड कर सकते हैं या बीटा वर्जन टेस्ट कर सकते हैं।

वहीं Apple के इकोसिस्टम में साइडलोडिंग पर सख्त पाबंदी है। iPhone यूजर्स को ज्यादातर ऐप्स के लिए आधिकारिक App Store पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

iOS 26 में कई नए फीचर्स जुड़ने के बावजूद Android अब भी कुछ मामलों में आगे नजर आता है। खासकर स्प्लिट स्क्रीन, मल्टीपल यूजर सपोर्ट और साइडलोडिंग जैसी सुविधाएं Android को ज्यादा लचीला बनाती हैं।

अगर आप ज्यादा कस्टमाइजेशन और फ्रीडम चाहते हैं, तो Android बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, सिक्योरिटी और इकोसिस्टम इंटीग्रेशन के लिए iPhone आज भी मजबूत दावेदार है।

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