सोशल संवाद / डेस्क : भारतीय एथलीट सावन बरवाल ने शनिवार को एशियन गेम्स 2026 की पुरुष मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकंड के समय के साथ रेस पूरी की। इस पदक के साथ भारत ने एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में 44 साल बाद पदक हासिल किया है।
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सावन की इस उपलब्धि के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने उन्हें बधाई दी। सावन ने इस प्रदर्शन के दौरान अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बेहतर किया।
सावन बरवाल ने बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड
सावन बरवाल ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2:11:36 का समय दर्ज किया। इसके साथ ही उन्होंने अपना पिछला राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।
इससे पहले अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में सावन ने 2 घंटे 12 मिनट से कम समय में मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बनने का रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने दिग्गज धावक शिवनाथ सिंह के लंबे समय से कायम राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। खास बात यह है कि एशियन गेम्स में यह सावन के करियर की दूसरी मैराथन थी।
जापान के इचिटाका यामाशिता ने जीता गोल्ड
पुरुष मैराथन में जापान के 29 वर्षीय इचिटाका यामाशिता ने 2:10:51 के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सावन उनसे पीछे रहे और उन्हें रजत पदक मिला। यामाशिता ने पूरी रेस के दौरान बढ़त बनाए रखी। स्टेडियम में पहुंचने पर घरेलू दर्शकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस जीत के साथ वह एशियन गेम्स की मैराथन में स्वर्ण पदक जीतने वाले जापान के सातवें एथलीट बन गए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी बधाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सावन बरवाल को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सावन के प्रदर्शन ने चार दशक से अधिक समय बाद एशियन गेम्स मैराथन के पोडियम पर भारत की वापसी कराई है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि लंबी दूरी के धावकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।
मनसुख मांडविया ने भी सराहा
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी सावन बरवाल की जीत पर बधाई दी। उन्होंने सावन के प्रदर्शन को भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। मांडविया के अनुसार, सावन ने पुरुष मैराथन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2:11:37 का समय दर्ज किया और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। हालांकि, उपलब्ध कराए गए परिणाम में सावन का समय 2:11:36 दर्ज है।
44 साल बाद मैराथन में भारत को पदक
एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन में भारत का पहला पदक 1951 में आया था। उस साल छोटा सिंह ने स्वर्ण और सुरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 1982 के एशियन गेम्स में होसुर कुक्कप्पा सीतारन ने कांस्य पदक हासिल किया। इसके 44 साल बाद सावन बरवाल ने 2026 में रजत पदक जीतकर भारतीय मैराथन इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
एशियन गेम्स में मैराथन में भारत के पदक
| वर्ष | खिलाड़ी | पदक | समय |
|---|---|---|---|
| 1951 | छोटा सिंह | स्वर्ण | 2:42:58.6 |
| 1951 | सुरत सिंह माथुर | कांस्य | 2:53:49.8 |
| 1982 | होसुर कुक्कप्पा सीतारन | कांस्य | 2:25:07 |
| 2026 | सावन बरवाल | रजत | 2:11:36 |
सावन बरवाल का यह रजत पदक भारतीय एथलेटिक्स के लिए अहम उपलब्धि है। साथ ही, उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रदर्शन देश में लंबी दूरी की दौड़ के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी दर्शाता है।











