सोशल संवाद/डेस्क: जब इरादे मजबूत हों और हौसले बुलंद हों, तो संसाधनों की कमी भी सपनों की राह नहीं रोक सकती। झारखंड की लाल मिट्टी से निकलकर भारतीय महिला हॉकी टीम तक पहुंची चार बेटियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है। एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शुक्रवार को गत चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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भारत की इस ऐतिहासिक जीत के साथ 44 साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ। इस जीत ने भारतीय महिला हॉकी टीम को एशियाई खेलों का चैंपियन बनाने के साथ लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 का टिकट भी दिला दिया। फाइनल मुकाबले में भारत के लिए निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया। वह अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही थीं। हालांकि, इस ऐतिहासिक जीत की कहानी में झारखंड की चार बेटियों का योगदान भी बेहद खास रहा।
सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग, दीपिका सोरेंग और निक्की प्रधान ने भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया। सिमडेगा और खूंटी जैसे ग्रामीण इलाकों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मंच तक पहुंचीं इन खिलाड़ियों की कहानी संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल है।
सलीमा टेटे: नंगे पैर हॉकी सीखने से भारतीय टीम की कप्तानी तक
सिमडेगा जिले के छोटे से गांव बड़की छापर से निकलने वाली सलीमा टेटे आज भारतीय महिला हॉकी की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। 27 दिसंबर 2001 को जन्मीं सलीमा का बचपन आर्थिक चुनौतियों के बीच गुजरा।
उनके पिता सुलक्षण टेटे किसान हैं, जबकि उनकी मां सुभानी टेटे परिवार का पालन-पोषण करने के लिए दूसरों के घरों में खाना बनाती थीं। सीमित संसाधनों के बीच सलीमा ने गांव के पथरीले मैदानों में नंगे पैर और बांस की स्टिक से हॉकी की शुरुआत की।
महज 16 साल की उम्र में उन्हें सीनियर टीम में जगह मिली। 2018 यूथ ओलिंपिक में उन्होंने भारतीय जूनियर टीम की कप्तानी करते हुए रजत पदक दिलाया। इसके बाद टोक्यो ओलिंपिक 2020 में उनके शानदार खेल ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
आज सलीमा टेटे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं और भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान के तौर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
सलीमा टेटे की प्रमुख उपलब्धियां
- टोक्यो ओलिंपिक 2020 में चौथा स्थान
- राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य पदक
- एशियाई खेल 2022 में कांस्य पदक
- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 और 2024 में स्वर्ण
- FIH नेशन्स कप 2022 और 2026 में स्वर्ण
ब्यूटी डुंगडुंग: चोट और पिता को खोने के बाद भी नहीं मानी हार
सिमडेगा की ब्यूटी डुंगडुंग की कहानी भी संघर्ष और वापसी की मिसाल है। 21 जुलाई 2003 को जन्मीं ब्यूटी को महज पांच साल की उम्र में उनके पिता ने बांस की हॉकी स्टिक बनाकर दी थी। आगे चलकर यही बच्ची भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा बनी और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) में स्पोर्ट्स ऑफिसर के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई।
साल 2023 में घुटने की गंभीर चोट के कारण ब्यूटी को करीब दो साल तक मैदान से दूर रहना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया। चोट और निजी जिंदगी के इस कठिन दौर के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। रिहैबिलिटेशन के बाद ब्यूटी ने राष्ट्रीय कैंप में शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन में अपनी जगह मजबूत की।
ब्यूटी डुंगडुंग की प्रमुख उपलब्धियां
- बिहार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2024 में स्वर्ण पदक
- FIH नेशन्स कप 2026 में स्वर्ण पदक
- एशिया कप 2025 में रजत पदक
- वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2026 में रजत पदक
निक्की प्रधान: झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी जिन्होंने ओलिंपिक खेला
खूंटी जिले की निक्की प्रधान ने झारखंड की महिला हॉकी खिलाड़ियों के लिए नई राह खोली। 8 दिसंबर 1993 को जन्मीं निक्की ने रियो ओलिंपिक 2016 में हिस्सा लेकर इतिहास रचा। वह ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं। शुरुआती दिनों में हॉकी स्टिक और दूसरी सुविधाओं की कमी के बावजूद निक्की ने अपनी मेहनत जारी रखी।
मार्च 2026 में उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 200 मैच पूरे किए। टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम के ऐतिहासिक चौथे स्थान तक पहुंचने में भी उनका अनुभव अहम रहा।
निक्की प्रधान की प्रमुख उपलब्धियां
- रियो ओलिंपिक 2016 में हिस्सा लिया
- टोक्यो ओलिंपिक 2020 में चौथा स्थान
- एशियाई खेल 2018 में रजत पदक
- एशियाई खेल 2022 में कांस्य पदक
- एशिया कप 2017 में स्वर्ण पदक
- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 में स्वर्ण पदक
- FIH नेशन्स कप 2022 और 2026 में स्वर्ण
दीपिका सोरेंग: मजदूरी करने वाली मां ने बेटी के सपने को दी उड़ान
सिमडेगा की दीपिका सोरेंग भारतीय महिला हॉकी की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल हैं। 17 दिसंबर 2003 को जन्मीं दीपिका ने भी बेहद कठिन परिस्थितियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अपनी पहचान बनाई। पिता के असामयिक निधन के बाद उनकी मां ने मजदूरी कर बेटी के हॉकी करियर को आगे बढ़ाया। भारतीय रेलवे से जुड़ी दीपिका ने SAI बेंगलुरु में प्रशिक्षण हासिल किया।
2023 जूनियर एशिया कप में दीपिका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छह मुकाबलों में सात गोल किए और भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने सीनियर टीम में अपनी जगह बनाई और आज भारतीय मिडफील्ड की भरोसेमंद युवा खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं।
दीपिका सोरेंग की प्रमुख उपलब्धियां
- जूनियर एशिया कप 2023 में स्वर्ण पदक
- जूनियर एशिया कप में 7 गोल
- हॉकी5s विश्व कप ओमान में रजत पदक
- एशिया कप 2025 में रजत पदक
- FIH नेशन्स कप न्यूजीलैंड 2026 में स्वर्ण पदक
झारखंड की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान
भारतीय महिला हॉकी टीम की इस ऐतिहासिक जीत में झारखंड की इन चार बेटियों की मौजूदगी राज्य के लिए भी गर्व का विषय है। सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग, निक्की प्रधान और दीपिका सोरेंग ने दिखाया है कि छोटे गांव और सीमित संसाधन किसी खिलाड़ी के सपनों की सीमा तय नहीं करते।
एशियाई खेलों में भारत का स्वर्ण पदक और लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 2028 का टिकट इन खिलाड़ियों के लिए एक नई शुरुआत है। इन चारों खिलाड़ियों की कहानी झारखंड और देश की उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात के बावजूद खेल की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देख रही हैं।











