सोशल संवाद /डेस्क : असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों की सहायता के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहयोग देने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा है कि राहत कार्यों को और तेज किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई जा सके। इसके साथ ही मंच ने देशभर के लोगों से भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है।
नई दिल्ली स्थित कलाम भवन में आयोजित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की छह राष्ट्रीय संयोजकों की कोर टीम की आपात बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद, मोहम्मद अफजाल, डॉ. शाहिद अख्तर, गिरीश जुयाल, अबू बकर नकवी और डॉ. शालिनी अली मौजूद रहे।
बाढ़ में जान गंवाने वालों को दी श्रद्धांजलि
बैठक की शुरुआत असम बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देकर की गई। साथ ही शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई। इसके बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की गई।
‘असम का दर्द पूरे देश का दर्द’
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने कहा कि असम में पैदा हुआ संकट केवल एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राजनीति नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।उन्होंने बताया कि संगठन मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहयोग देगा और हर नागरिक से अपनी क्षमता के अनुसार बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील करता है।
प्रभावित इलाकों का दौरा कर तैयार की गई रिपोर्ट
राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शाहिद अख्तर और गिरीश जुयाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट कोर टीम के सामने रखी। डॉ. शाहिद अख्तर ने बताया कि कई परिवारों ने एक ही दिन में अपना घर, खेती और वर्षों की जमा-पूंजी खो दी है। उन्होंने कहा कि कई बुजुर्गों ने इसे अपने जीवन की सबसे भयावह बाढ़ बताया।उनके अनुसार इस बार की बाढ़ ने असम के कई जिलों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है और लाखों लोग तत्काल सहायता के इंतजार में हैं।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की अपील
राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। उन्होंने राहत शिविरों में पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों, स्वच्छता सामग्री और सुरक्षित आश्रय की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
‘मानवता सबसे बड़ा धर्म’
राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं धर्म, जाति और समुदाय नहीं देखतीं। ऐसे समय में मानवता सबसे बड़ा धर्म होती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के राहत कार्यों में जुटे रहेंगे और समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की।
राहत अभियान को मिलेगा विस्तार
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संगठन खाद्य सामग्री, दवाइयां, कपड़े और अन्य जरूरी राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक लगातार पहुंचाएगा। साथ ही राहत अभियान का दायरा बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
करीब छह लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप महानगर समेत कई जिले बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अनुमान है कि करीब छह लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं।हजारों परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। बड़ी संख्या में घर, सड़कें, पुल, कृषि भूमि और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है। कई गांव अब भी पानी से घिरे हुए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पशुधन और खेती को हुए नुकसान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
दीर्घकालिक पुनर्वास पर भी रहेगा फोकस
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा कि तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और हजारों परिवारों को लंबे समय तक सहायता की आवश्यकता होगी। इसी को देखते हुए राहत अभियान को आने वाले दिनों में और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंच सके।









