सोशल संवाद / डेस्क : त्योहारों के सीजन से पहले Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने एनालॉग पनीर को लेकर बड़ा कदम उठाया है। FSSAI ने Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत दूध से नहीं बने एनालॉग प्रोडक्ट्स को ‘Paneer’ नाम से बेचने, लेबल करने या मार्केटिंग करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
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हालांकि, यह अभी अंतिम नियम नहीं है। FSSAI ने ड्राफ्ट पर लोगों और संबंधित पक्षों से 60 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।
क्या होता है Analog Paneer?
एनालॉग पनीर ऐसा नॉन-डेयरी प्रोडक्ट है, जिसमें दूध से मिलने वाले घटकों की जगह वनस्पति तेल, फैट, वेजिटेबल प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे खाद्य घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह देखने और इस्तेमाल में पारंपरिक पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी संरचना दूध से बने असली पनीर से अलग होती है। FSSAI का प्रस्ताव इसी अंतर को उपभोक्ताओं के सामने स्पष्ट करने से जुड़ा है।
FSSAI क्यों बदलना चाहता है नियम?
FSSAI का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी खाद्य उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना की सही जानकारी मिलनी चाहिए। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसे नॉन-मिल्क प्रोडक्ट्स को ‘Paneer’ नाम से प्रस्तुत किए जाने से रोकना है, ताकि ग्राहक भ्रमित न हों।
प्रस्ताव के अनुसार, जिन प्रोडक्ट्स को पहले से ‘Analogue in Dairy Context’ कैटेगरी के तहत लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन मिला हुआ है, उन्हें अपने नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल बंद करना होगा।
क्या अभी से Analog Paneer पर बैन लग गया है?
नहीं। फिलहाल FSSAI ने नियम में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है। यह अंतिम नियम नहीं है।
FSSAI ने stakeholders और आम लोगों से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं। आधिकारिक प्रक्रिया के तहत Gazette notification सार्वजनिक होने के बाद 60 दिन की अवधि पूरी होने पर इन सुझावों पर विचार किया जाएगा।
असली पनीर और Analog Paneer में क्या अंतर?
असली पनीर दूध से बनाया जाता है और FSSAI के मौजूदा मानकों में पनीर के लिए दूध/दूध से प्राप्त सामग्री तथा निर्धारित composition standards का पालन जरूरी है।
वहीं Analog Paneer में दूध से प्राप्त घटकों की जगह नॉन-डेयरी ingredients का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए FSSAI का प्रस्ताव मुख्य रूप से नाम और लेबलिंग को लेकर स्पष्टता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
क्या Analog Paneer सेहत के लिए खतरनाक है?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। किसी प्रोडक्ट का नॉन-डेयरी या एनालॉग होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह जहरीला या तुरंत स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
हालांकि, ऐसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उनकी मात्रा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए लेबल पर ingredients और nutritional information देखना महत्वपूर्ण है। FSSAI का प्रस्ताव भी मुख्य रूप से उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को सही तरीके से बताने और उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने से जुड़ा है।
कई राज्यों में पहले से उठाया गया है कदम
Analog Paneer को लेकर देश के कुछ राज्यों में पहले भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Karnataka, Gujarat और Maharashtra समेत कई राज्यों ने इस तरह के उत्पादों के खिलाफ राज्य स्तर पर कदम उठाए हैं।
अब FSSAI के प्रस्ताव से इस मुद्दे पर देशभर में एक समान नियामकीय व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ सकता है।
उपभोक्ताओं को क्या ध्यान रखना चाहिए?
पनीर खरीदते समय ग्राहक कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- पैकेट पर ingredients list जरूर पढ़ें।
- ‘Paneer’ और ‘non-dairy/analogue’ जैसे शब्दों को ध्यान से देखें।
- पैकेज्ड प्रोडक्ट पर FSSAI लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की जानकारी जांचें।
- बहुत कम कीमत वाले पनीर की गुणवत्ता और लेबलिंग की जांच करें।
- रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले पनीर की जानकारी जरूरत पड़ने पर पूछ सकते हैं।
FSSAI का प्रस्ताव लागू होने के बाद नॉन-डेयरी उत्पादों की पहचान और नामकरण को लेकर नियम और स्पष्ट हो सकते हैं।












